अमित दवे
जोधपुर।
बदलते समय के साथ अब तकनीक जीवन का अंग बनती जा रही है। देश में 21वीं सदी के अनुरूप विकसित हो रही तकनीकें अब खेती में भी देखने को मिल रही है। इन्हीं तकनीकों का उपयोग कर प्रदेश में अब प्याज-लहसुन का खेती की जाएगी। इन नई तकनीकों से प्याज-लहसुन की नई प्रजातियां पैदा कर किसानों को उपलब्ध कराई जाएगी। जिससे किसानों को अच्छी पैदावार के साथ अच्छी आमदनी होगी व उनका जीवन स्तर सुधरेगा।कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर ने राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान नई दिल्ली के साथ प्याज एवं लहुसन के अनुसंधान, नवीन प्रजातियों के विकास व उचित भण्डारण के लिए तीन वर्ष का एमओयू किया है। कृषि विवि कुलपति प्रो बीआर चौधरी ने बताया कि प्रदेश में प्याज-लहसुन अच्छी क्वालिटी का पैदा होता है। इस एमओयू से होने वाले कार्यों से प्रदेश के लाखों किसानों को फायदा मिलेगा।
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एआई व रोबोटिक्स से खेती में मैनेजमेंट
प्याज-लहसुन की खेती पारंपरिक तरीके से हटकर की जाएगी। खेती में ज्यादा मानव श्रम की जगह कृत्रिम बुद्धिमता (आर्टिफिशियल स्वचालित जैसे समकालीन नवाचारों के माध्यम से बेहतर मानव श्रम का प्रबन्धन किया जाएगा। ताकि इस कार्य में लग रहे मानव श्रम का अन्य कार्यों में उपयोग किया जा सकेगा।
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बेहतर मैनेजमेंट पर फोकस
- कटाई के बाद प्रबन्धन की गतिविधियों मे पारंपरिक और नवीन तकनीकों का उपयोग करते हुए उपयुक्त टेक्नोलॉली विकसित कर कृषि कार्यो मे लगने वाली उर्जा का बेहतर प्रबंधन किया जाएगा।
- कृषि उपकरणों के कुशल और समयबद्ध उपयोग के लिए नवीन टेक्नोलॉजी का विकास करना।
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इन्होंने किए एमओयू पर हस्ताक्षर
तीन वर्षीय एमओयू पर कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर की ओर से कुलसचिव अदिति पुरोहित तथा राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान नई दिल्ली की ओर से अतिरिक्त निदेशक डॉ पी.के गुप्ता ने हस्ताक्षर किए।
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