जोधपुर. राजस्थान हाईकोर्ट ने फलोदी जिले के खींचन गांव में शीतकालीन प्रवास के लिए आने वाले प्रवासी पक्षी कुरजां के प्रवास स्थल पर नई हाईटेंशन लाइन बिछाने को चुनौती देने वाली जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार एवं पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड से जवाब मांगा है।
मुख्य न्यायाधीश ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और न्यायाधीश विनित कुमार माथुर की खंडपीठ में याचिकाकर्ता किशनसिंह की ओर से अधिवक्ता वीएलएस राजपुरोहित ने कहा कि खींचन में हर साल हजारों प्रवासी पक्षी कुरजां शीतकालीन प्रवास के लिए आते हैं। उनके प्रवास को सुरक्षित रखने के लिए पूर्व में राजस्थान हाईकोर्ट ने स्व प्रसंज्ञान लेते हुए एक जनहित याचिका की सुनवाई शुरू की थी, जिसमें राज्य सरकार ने आश्वासन दिया था कि कुरजां के विचरण पथ पर हाईटेंशन ट्रांसमिशन लाइनें नहीं बिछाई जाएगी, लेकिन इसके बावजूद पावर ग्रिड कॉर्पाेरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड एक हाईटेंशन ट्रांसमिशन लाइन निर्मित कर रहा है। इससे प्रवासी पक्षियों की आवाजाही में फिर से बाधा उत्पन्न होने और उड़ान के दौरान उनके दुर्घटनाग्रस्त होने की आशंका है। राजपुरोहित ने कहा कि खींचन में प्रवासी पक्षियों के आश्रय स्थल को हाल ही राज्य सरकार ने कुरजां संरक्षण रिजर्व क्षेत्र घोषित किया है और इसे विकसित करने के लिए दो करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। याचिकाकर्ता ने बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी की एक रिपोर्ट भी प्रस्तुत की, जिसमें स्पष्ट रूप से दावा किया गया है कि पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया कंपनी लिमिटेड की ओर से हाईटेंशन ट्रांसमिशन लाइन के निर्माण से प्रवासी पक्षी कुरजां के लिए खतरा पैदा हो जाएगा। खंडपीठ ने अतिरिक्त महाधिवक्ता संदीप शाह को राज्य सरकार की ओर से तथा बिजली कंपनी की ओर से कपिल पुरोहित को नोटिस स्वीकार करने के निर्देश दिए। साथ ही दो सप्ताह की अवधि के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। अगली सुनवाई 4 अक्टूबर को होगी।
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