जोधपुर।
आषाढ़ शुक्ल पक्ष प्रतिपदा सोमवार से गुप्त नवरात्रि शुरू होगी। गुप्त नवरात्रि वृद्धि योग में मनाई जाएगी। इस दिन वृद्धि योग सुबह से देर रात 1:15 बजे तक रहेगा। गुप्त नवरात्री के अवसर पर 10 महाविद्याओं की पूजा की जाएगी। यह समय महाकाली व भगवान शिव यानी शाक्त और शैव की पूजा करने वालों के लिए विशेष माना जाता है। गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के साथ दस महाविद्याओं की भी पूजा की जाएगी। पं प्रेमप्रकाश ओझा ने बताया कि तंत्र साधक इस दौरान विशेष साधनाएं करते हैं। इस बार आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि में कई विशेष योग भी बन रहे हैं। तंत्र मंत्र सीखने वाले साधकों के लिए गुप्त नवरात्रि बेहद खास होती है।
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यह रहेगा कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
पं अनीष व्यास ने बताया कि पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि सोमवार सुबह 11:25 बजे समाप्त होगी। चूंकि उदया तिथि मान्य होती है इसलिए गुप्त नवरात्रि की शुरुआत सोमवार से होगी। नवरात्रि का समापन 28 जून को होगा।
- घट स्थापना मुहूर्त - सुबह 5:23 से 7:27 बजे तक।
- अभिजित मुहूर्त - सुबह 11:55 से दोपहर 12:50 बजे बजे तक ।
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10 महाविद्याओं की साधना
मां काली, मां तारा, मां त्रिपुरसुंदरी, मां भुवनेश्वरी, मां छिन्नमस्ता, मां त्रिपुर भैरवी, मां धूमावती, मां बगलामुखी, मां मातंगी व मां कमला की विशेष आराधना की जाती है।
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साल में कुल चार नवरात्रि
हिंदू धर्म शास्त्रों में कुल चार नवरात्रि का वर्णन है। चैत्र और शारदीय नवरात्रि के अलावा दो गुप्त नवरात्रि भी होती हैं। एक गुप्त नवरात्रि माघ और दूसरी आषाढ़ के महीने में पड़ती है।
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