प्रेम भंडारी
एजुकेशन - बी. कॉम और समाज सेवा में डॉक्ट्रेट
कार्यक्षेत्र - व्यापार व समाज सेवा।
कब से - 1987 से अमरीका में बसे हैं।
जोधपुर। मैं प्रेम भंडारी हूं। अपने परिवार के साथ 1987 में जोधपुर से न्यूयॉर्क में शिफ्ट हो गया। इससे पहले 1977 में मेरी बड़ी बहन की शादी अमरीका में रह रहे के.के मेहता के साथ हो चुकी थी। 1985 में मेरे पिता भी न्यूयॉर्क में सेटल हो चुके थे, हालांकि 1966-67 में यूनिवर्सिटी स्टेनफोर्ड में एक्सचेंज प्रोफेसर रह चुके थे। शुरुआत में छोटी-मोटी नौकरी की और चौकीदारी का काम तक किया। फिर खुद का छोटा व्यवसाय शुरू किया। इस दौरान मेरी शादी डॉक्टर रेखा भंडारी से हो गई। रेखा अमरीका में तीन बोर्ड पास कर चुकी और इमिग्रेंट के उच्चतम अवार्ड व अमरीका के दोनों सदन से मान्यता प्राप्त करने वाली महिला है।
अमरीका में ही धीरे-धीरे मैंने अपने व्यापार को बढ़ाया। होटल व्यवसाय में पार्टनर के साथ टाइम स्क्वायर व एम्पायर स्टेट बिल्डिंग जैसे क्षेत्रों में होटल व्यवसाय किया। मेरे जीवन का टर्निंग पॉइंट 2002 में आया। तब तक मैं एक स्थापित व्यवसायी हो चुका था। उस समय मेरे न्यूयॉर्क ऑफिस में जयपुर फुट के संस्थापक डी.आर मेहता से मिला। उन्हें संस्था के लिए कुछ राशि चेरिटी में देने की कोशिश की। लेकिन उन्होंने लेने से इनकार किया और कहा कि जयपुर में सेंटर आकर देखें। जब मैं जयपुर पहुंचा और देखा कि कहां मैं लाखों रुपए जूते खरीदने पर खर्च देता था और लोगों के पास तो पैर ही नहीं है। इसके बाद मेरा जिदंगी के प्रति नजरिया बदल गया और अपने जीवन को साधारण लाइफस्टाइल की ओर मोड़ लिया।
पहले मैं लाखों रुपए की घडिय़ा, हजारों के पैन, महंगी कारें, कपड़े व चश्मे में अपनी पूंजी लगा देता था। जब जयपुर में वह माहौल देख कर आया तो कई हफ्तों तक सो नहीं पाया। इसके बाद जीवन जयपुर फुट को समर्पित कर दिया और 2014 में जयपुर फुट यूएसए का प्रमुख कार्यकर्ता बन गया। अब अफसोस होता है कि कैसे मैंने मादक पदार्थों की पार्टियों व गुटखे में लाखों-लाखें रुपए उड़ा दिए। लेकिन अब अपनी पूरी पंूजी सामाजिक कार्यों में लगा रहा हूं। मेरे जीवन पर भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति व जयपुर फुट के संस्थापक डी.आर मेहता, अंर्तराष्ट्रीय न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस दलवीर भंडारी और पूर्व आईपीएस के.के शर्मा का काफी प्रभाव है।
सेवा अनुभव
- 19 साल से जयपुर फुट से जुड़े हैं।
- 7 साल से जयपुर फुट यूएसए के चेयरमैन हैं।
- दो दशक से पूरे विश्व में तीन करोड़ से अधिक अप्रवासी भारतीयों की प्रमुख आवाज हैं।
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