जोधपुर।
जोधपुर सहित देश के अन्य क्षेत्रों के हैण्डीक्राफ्ट निर्यातकों ने केन्द्र सरकार से रेमिशन ऑफ ड्यूटीज एंड टैक्सेज ऑन एक्सपोर्ट प्रोडक्ट्स (रोडटेप) स्कीम में निर्यातको को दी जाने वाले इंसेन्टिव को बढ़ाने की मांग उठाई है। जिसके चलते अब केन्द्रीय वित मंत्रालय ने एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फ ोर हैण्डीक्राफ्ट (ईपीसीएच) के मध्यम से हैण्डीक्राफ्ट निर्यातक, रॉ मेटीरियल, कोस्टिंग व संबंधित अन्य डेटा की मांग की है।जोधपुर के हैण्डीक्राफ्ट निर्यातकों ने केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री गजेन्द्रसिंह शेखावत की अध्यक्षता में केन्द्रीय वाणिज्य एवं कपडा मंत्री पीयूष गोयल से जोधपुर के हैण्डीक्राफ्ट व ग्वारगम उद्योग पर रोडटेप स्कीम के तहत इंसेंन्टिव बढ़ाने की गुजारिश की थी ।
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नई स्कीम में केवल 0.5 प्रतिशत इंसेन्टिव
केन्द्र सरकार की ओर से जारी नई स्कीम रोडटेप में हैण्डीक्राफ्ट उत्पादों पर मात्र 0.5 प्रतिशत तक का ही इंसेन्टिव जारी किया है । पहले प्रोत्साहन के रूप में मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट फ्र ॉम इंडिया स्कीम (एमईआइएस) के तहत 5 से 7 प्रतिशत तक का प्रोत्साहन मिलता था, लेकिन नई स्कीम में यह प्रोत्साहन घटाकर केवल 0.5 प्रतिशत कर दिया है, जो ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।
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ईपीसीएच ने बनाई कमेटियां
ईपीसीएच ने इस संबंध में देश के विभिन्न हैण्डीक्राफ्ट क्लस्टर के निर्यातकों के साथ ऑनलाइन मीटिंग कर हैण्डीक्राफ्ट निर्यातकों की अलग-अलग उत्पाद अनुसार कमेटियां बना दी है, जो हर क्षेत्र का अध्ययन करके ईपीसीएच को डेटा उपलब्ध करवाएगी । इस संबंध में ईपीसीएच का एक्सपर्ट पैनल भी इन कमेटियों से फ ॉलोअप लेगा। ईपीसीएच ने जोधपुर के वुडन व आयरन हैण्डीकाफ्ट क्लसटर के लिए ईपीसीएच के सीओए सदस्य हंसराज बाहेती व डॉ भरत दिनेश को अन्य सदस्यों के साथ मिल डेटा उपलब्ध करवाने की जिम्मेदारी दी है। ईपीसीएच के डायरेक्टर जनरल डॉ राकेश कुमार ने बताया कि ईपीसीएच हैण्डीक्राफ्ट पर रोडटेप प्रोत्साहन की दर बढ़ाने की हरसंभव कोशिश कर रहा है । मीटिंग में ईपीसीएच के चेयरमैन आरके मल्होत्रा, कार्यकारी निदेशक आरके वर्मा व राजेश रावत सहित देश के अनेक हैण्डीक्राफ्ट निर्यातक मौजूद थे
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लाखों कारीगरों के रोजगार पर पड़ेगा असर
ईपीसीएच के सीओए सदस्य डॉ दिनेश ने बताया कि कोरोना के कारण इस कठिन समय में जब निर्यातक चौतरफ ा कठिनाइयों का सामना कर रहे है । ऐसे में केन्द्र से मिलने वाले प्रोत्साहन को कम कर देना निर्यातकों के लिए बड़ा झटका है । इससे देश के निर्यात की गति आने वाले दिनो में कम होगी । इसका सीधा असर हैण्डीक्राफ्ट में काम करने वाले लाखों कारीगरों के रोजगार पर भी पड़ेगा ।
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