जोधपुर. पितृ ऋण से मुक्ति के पर्व पितृपक्ष में अमावस्या को गजछाया व सर्वार्थसिद्धि योग बन रहा है। सर्वपितृ अमावस्या को मोक्षदायिनी अमावस्या भी कहा जाता है। इस बार 6 अक्टूबर को पितृपक्ष यानि श्राद्ध पक्ष भी खत्म होगा इसके अगले दिन से शारदीय नवरात्र की शुरुआत भी होगी। ज्योतिषियों के अनुसार श्राद्ध पक्ष में गजछाया योग का बनना दुर्लभ माना गया है। गजछाया योग दिनांक 6 अक्टूबर को सूर्योदय से शाम 4.35 बजे तक विशेष रूप से रहेगा। गजछाया योग में तीर्थ स्नान, दान और जप का विशेष महत्व है। शास्त्रों में कहा गया है कि श्राद्ध पक्ष में जिस दिन गजछाया योग लगता है तो उस दिन पितरों को दिया गया जल और पिण्ड का सुख उन्हें 13 वर्षों तक प्राप्त होता है। सर्वपितृ अमावस्या तिथि पांच अक्टूबर को शाम 7.05 बजे से छह अक्टूबर को शाम 4.35 बजे तक रहेगी। 100 साल बाद सर्वार्थसिद्धि योग में अमावस्या रहेगी। इस दिन सूर्य मंगल बुध और चंद्रमा के कन्या राशि में विराजमान होने से चतुग्र्रही योग भी बनेगा। इस दिन भूले-बिसरे पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध किया जाता है। सर्वपितृ अर्थात ज्ञात अज्ञात सभी पितरों को अमावस्या के दिन श्राद्ध और तर्पण किया जाना शास्त्र सम्मत है। जिन लोगों को अपने परिजनों की मृत्यु की तिथि याद ना हो वो भी इस दिन पितरों का श्राद्ध और तर्पण कर कर सकते हैं।
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