फर्जी परीक्षार्थी होनहार छात्रों के जीवन में हताशा और निराशा भर देते हैं: कोर्ट

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जोधपुर. राजमहल स्थित राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय में 26 सितंबर को हुई रीट की सेकंड पारी की परीक्षा में किसी अन्य परीक्षार्थी की जगह परीक्षा दे रहे 24 और 30 साल के दो युवाओं के अपराध पर तल्ख टिप्पणी के साथ कोर्ट ने जमानत देने से इंकार कर दिया। भीनमाल कस्बे का निवासी 24 वर्षीय आरोपी दिनेश पंवार पुत्र आसुराम तथा जालोर जिले के बागौड़ा पुलिस थाना निवासी 30 वर्षीय प्रकाश चौधरी पुत्र दुर्गाराम ने जमानत याचिका पेश कर कहा कि झूठा फंसाया गया है। सहायक अभियोजन अधिकारी श्यामसुंदर सुथार ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपित को रीट परीक्षा में किसी अन्य परीक्षार्थियों की जगह फर्जी तरीके से परीक्षा देते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।

कोर्ट आर्डर में तीखी टिप्पणी
महानगर मजिस्ट्रेट संख्या तीन के पीठासीन अधिकारी मदनलाल बालोटिया ने दोनों आरोपी की जमानत खारिज करते हुए आर्डर में लिखा कि आरोपियों के इस तरह के अपराध से होनहार तथा मेहनतकश परीक्षार्थियों के जीवन में हताशा व निराशा व्याप्त हो जाती है। रीट की परीक्षा शिक्षकों की नियुक्ति से संबंधित परीक्षा है यदि सार्वजनिक परीक्षा में अयोग्य विद्यार्थियों का चयन हो जाता है तो अयोग्य शिक्षकों की भर्ती हो सकती है। शिक्षक देश का भविष्य होता है ,आरोपियों ने गलत तरीके अपनाकर फर्जीवाड़ा किया है, इस तरह की धोखाधड़ी से कई विद्यार्थी हताशा और निराशा के कारण अपना जीवन तक समाप्त कर देते हैं। परिस्थितियों और तथ्यों के मद्देनजर दोनों आरोपियों को जमानत का लाभ देने से समाज व प्रतियोगी परीक्षा के छात्रों में गलत मैसेज जाएगा। कोर्ट ने तीखी टिप्पणी के साथ दोनों की जमानत खारिज कर दी।



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