जोधपुर. राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान शनिवार को जोधपुर की तीनों पारिवारिक न्यायालयों में 90 प्रतिशत मामलों का निपटारा सलाह-समझाइश और समझदारी से हो गया। अधिकतर मामलों में पति-पत्नी के बीच सोशल मीडिया खलनायक बनकर सामने आया, रोचक बात यह रही कि सोशल मीडिया ने पति पत्नी को फिर से मिलाने का जरिया बना और नायक की भूमिका निभाई। पारिवारिक न्यायालय संख्या एक में 75 मामलों में से 66 मामलों में राजीनामा हुआ, न्यायालय संख्या दो में 34 मामले सूचीबद्ध थे। उनमें से 27 मामलों का निपटारा कर दिया गया, वहीं न्यायालय संख्या तीन में 23 मामले सूचीबद्ध थे। उनमें से 20 मामले राजीनामे से खत्म कर दिए।राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान राजस्थान हाईकोर्ट में बेच संख्या एक में वरिष्ठ न्यायाधीश संदीप मेहता तथा अधिवक्ता प्रदीप शाह ने 35 मामले राजीनामे के साथ निपटाए, इस दौरान पुष्टीकर साख सहकारी समिति के अधिवक्ता कपिल बोहरा तथा दीनदयाल पुरोहित ने दो क्रिमिनल रिवीजन में राजीनामा करते हुए एक महिला को राहत दी।
सोशल मीडिया पति पत्नी के बीच अलगाव का कारण बना
एक रोचक मामले में सोशल मीडिया पति पत्नी के बीच अलगाव का कारण बना और वही सोशल मीडिया उनके बीच दूरियां कम कर एक होने का जरिया भी बना। पति सोशल मीडिया पर अन्य महिला से चैटिंग करता पकड़ा गया। पत्नी ने तलाक का मुकदमा लगा दिया, उसी सोशल मीडिया पर पति पत्नी के बीच बातचीत होने लगी तो दूरियां कम होती गई।
चौपासनी हाउसिंग बोर्ड निवासी पिंकी (बदला हुआ नाम) की शादी 9 फरवरी 1999 को जयपुर के कालवाड़ रोड निवासी मुकेश (बदला हुआ नाम) के साथ हुई, शादी के बाद दांपत्य जीवन खुशहाल रहा, दोनों के एक लडक़ा हुआ। 20 साल तक शादी आराम से चली। लेकिन पिछले दिनों पत्नी को पता चला कि पति सोशल मीडिया पर कुछ ज्यादा ही सक्रिय हो रहा है, वह अन्य महिला के साथ चैटिंग करता है। सोशल मीडिया को लेकर दोनों के बीच झगड़ा शुरू हुआ जो आगे चलकर मारपीट तक पहुंच गया,पति ने पत्नी तथा लडक़े को घर से निकाल दिया गया। एक मई 2019 को पत्नी अपने पीहर जोधपुर आ गई और कोर्ट में तलाक का मुकदमा लगा दिया। लॉकडाउन के दौरान सोशल मीडिया से ही दोनों के बीच में दूरियां कम हुई, इसके बाद पत्नी के अधिवक्ता एलएन माथुर की समझाईश से राष्ट्रीय लोक अदालत में दोनों ने मुकदमें वापस लेने की स्वीकृति दे दी।
सात वर्ष तक बच्चे के साथ पीहर रही, शिकवे भुलाकर शनिवार को ससुराल गई
एक अन्य मामले में जोधपुर निवासी महेंद्र (बदला हुआ नाम) का विवाह मोनिका (बदला हुआ नाम) के साथ 2012 में वैलंटाइन डे पर हुआ। एक पुत्र का जन्म हुआ। दैनिक काम को लेकर मनमुटाव हुआ और पत्नी 4 मार्च 2014 को पीहर चली गई। पीहर से पति के खिलाफ तलाक का नोटिस भेज दिया। पति ने भी कोर्ट में पत्नी से दाम्पत्य अधिकारों की पुनस्र्थापना की गुहार लगाते हुए हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 9 के तहत परिवाद लगाया,दोनों मुकदमों को एक साथ रखा गया। राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान पारिवारिक न्यायालय संख्या दो के न्यायाधीश रुपचंद सुथार तथा सदस्य अधिवक्ता सुषमा धारा ने दोनों को साथ बैठाकर बच्चे के भविष्य की दुहाई देते हुए समझाया। आखिर दोनों के दिल में छिपी कटुता पिघली और साथ रहने को तैयार हो गए।न्यायालय में ही दोनों ने फिर से वरमाला पहनी और घर चले गए।
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