गिफ्ट नहीं दी तो कर दिया फेल, अब सभी फस्र्ट डिविजन पास

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जोधपुर. डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय के सर्जरी विभाग के जुलाई में घोषित परीक्षा परिणाम में जिन 6 में से 5 रेजिडेंट डॉक्टर्स को फेल कर दिया गया था, अब वे फस्र्ट डिविजन पास हो गए हैं। विवि के कुलपति प्रो अभिमन्यु कुमार सिंह और रजिस्ट्रार सीमा कविया ने छात्रों की मांग को गंभीरता से लेते हुए उनकी उत्तर पुस्तिकाएं वापस जांचने के लिए जोधपुर से बाहर भेजी और प्रेक्टिकल परीक्षाओं का आयोजन भी दुबारा करवाया। दो दिन पहले घोषित परिणाम में अब सभी पास होकर अगली कक्षा में आ गए हैं। रेजिडेंट डॉक्टर्स को जानबूझकर फेल करने वाले सर्जरी के एक शिक्षक पर अब कार्रवाई होगी। विवि की कमेटी इस पर निर्णय करेगी।

आयुर्वेद विवि में 11 विभाग में स्नातकोत्तर होती है। वर्ष 2019 बैच के 66 विद्यार्थियों ने जनवरी में परीक्षा दी थी। जुलाई में घोषित परिणाम में 6 फेल हो गए। इसमें पांच अकेले सर्जरी विभाग के थे। इसमें विवि की स्नातक टॉपर डॉ निशा शर्मा और ऑल इंडिया आयुर्वेद पीजी एंट्रेंस टेस्ट में बेहतर रैंकर रही केरल की डॉ अखिला एआर भी शामिल थी। छात्रों ने विवि प्रशासन को शिकायत देकर सर्जरी के शिक्षक पर प्रेक्टिल में पास करने के लिए प्रत्येक छात्र से एक-एक Hard Disk और ईयर फोन (वायरलेस) की डिमांड की थी। सीनियर बैच के छात्रों से वाटर कंडेंशन मांगा था। छात्रों ने शिक्षक की डिमाण्ड पूरी नहीं की और उन्हें फेल कर दिया गया। राजस्थान पत्रिका ने अपने 8 जुलाई के अंक में ‘विवि टॉपर सहित सर्जरी के 6 में से 5 विद्यार्थियों को किया फेल’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर इस मुद्दे को उठाया था।

रेजिडेंट डॉक्टर -----पहले मिले अंक- दुबारा जांच में मिले अंक
डॉ निशा शर्मा -------- 82 -------- 139
डॉ अखिला -------- 69 -------- 141
डॉ मोहन ---------- 75 -------- 134
डॉ आशा रानी --------94 --------125
डॉ दीपशिखा --------96 -------- 127
डॉ शिप्रा -------- 100 -------- 140
(ये अंक 200 में से दिए गए। )

कुलपति ने दिखाई सक्रियता
इस मामले को विवि के कुलपति प्रो अभिमन्यु कुमार सिंह ने गंभीरता से लिया और छात्रों की मांगों पर पूरी कार्रवाई की, जिससे छात्रों का एक साल खराब होने से बच गया।

हर जगह परेशान हैं रेजिडेंट डॉक्टर्स
रेजिडेंट डॉक्टर्स अपने विभाग के एचओडी व सुपरवाइजर डॉक्टर के अधीन होते हैं। ऐसे में सुपरवाइजर डॉक्टर तीन साल तक रेजिडेंट डॉक्टर्स का बेजां फायदा उठाते हैं। एलोपैथी के रेजिडेंट्स का भी यही हाल है। कई डॉक्टर्स इन रेजिडेंट्स से अपने घरेलू और निजी कार्य भी करवाते हैं। फेल होने के डर से रेजिडेंट डॉक्टर शिकायत नहीं करते हैं।



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