जोधपुर. जोधपुर के एम्स व एमडीएम अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग में हर साल अंडर-40 आयु में ह्रदय रोगी बनने वाले 2 सौ मरीजों के मामले सामने आते है। इतना ही नहीं, इन रोगियों में 50 से 70 फीसदी तक को एंजियोप्लास्टी तक की जरूरत पड़ती है। चिकित्सकों के अनुसार स्मोकिंगऔर युवाओं को जॉब स्ट्रेस ह्रदय रोग की तरफ धकेल रहा है। इसके अलावा मोटापा व अनियमित दिनचर्या सहित तमाम कारण है।
क्या कहते हैं कार्डियोलॉजिस्ट और मानिए इनकी सलाह
डॉ. एससएन मेडिकल कॉलेज कार्डियोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रोहित माथुर ने बताया कि कोरोनाकाल में करीब पौने दो सौ युवाओं का अटैक आया है। 60 से अधिक युवाओं की एंजियोप्लास्टी तक करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि मुख्य कारण स्ट्रेस, तंबाकू सेवन सहित कई बड़े कारण है। फिजिकल स्ट्रेस में जिम में बॉडी बिल्डिंग एक्सरसाइज अत्यधिक करना खतरनाक हो सकता है। डॉ. एससएन मेडिकल कॉलेज कार्डियोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पवन सारडा ने कहा कि युवाओं में डायबिटीज, ब्ल्ड प्रेशर व कैलोस्ट्रॉल के अलावा स्मोकिंग, फिजिकल एक्टिवीटी की कमी व स्ट्रेस फूल जिंदगी हार्ट बीमारी होने के मुख्य कारण है। इस कारण ही हार्ट रोग जल्दी युवाओं को हो रहा है। एम्स के कार्डियोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुरेन्द्र देवड़ा ने कहा कि करीबन सौ मामले हर साल ऐसे सामने आते हैं, जिनमें ह्रदय मरीज की आयु 40 वर्ष से कम होती है। धू्रमपान सबसे बड़ा कारण है। इसके बाद मोटापे से डायबिटीज व ब्लड प्रेशर अत्यधिक होता है, ये सभी कारण युवाओं को ह्रदय रोगी बनाते है। जबकि मोटापा घटा व धू्रमपान बंद कर ह्रदय रोग की संभावनाएं कम की जा सकती है।
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