जोधपुर. महज चौदह साल की फूल सी बेटी को जब हड्डी बनाने वाली कोशिकाओं के कैंसर जैसी दुर्लभ बीमारी घेर ले तो परिवार की क्या हालत होगी, इसका अंदाजा आप और हम आसानी से नहीं लगा सकते। एक निजी कम्पनी में सिक्यूरिटी सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत इस बेटी के पिता पिछले साल मार्च से बेटी की सेवा में ही लगे हैं। चिकित्सक कहते हैं कि अभी उन्हें बेटी के इलाज के लिए अगले दिसम्बर तक मुंबई में ही रहना होगा। ऐसे में परिवार के लिए जीवनयापन करना भी मुश्किल हो रहा है। इलाज के लिए लाखों रुपए का इंतजाम करने की सोचकर ही परिवार की हालत पतली हो रही है।
दरअसल, जोधपुर के भोपालगढ़ के गांव गोविंदपुरा के रहने वाले नीलेश कुमार मिश्रा की पुत्री चाहत मुंबई के टाटा मेमोरियल अस्पताल में भर्ती है। वह ऑस्टियोजेनिक सकोरमा नामक दुर्लभ कैंसर से ग्रसित है। मिश्रा कहते हैं कि संक्रमण ज्यादा फैलने के कारण पिछले साल अगस्त में चाहत का बायां पैर काटना पड़ा। अब भी उसकी 12 कीमोथैरेपी होने के साथ कृत्रिम पैर लगना है, लेकिन इसका भारी भरकम खर्च परिवार जुटा नहीं पा रहा।
अचानक घेर लिया बीमारी ने
यह बच्ची साइकिल चलाने के दौरान गिर गई थी। कई चिकित्सकों को दिखाने के बाद भी इलाज नहीं हुआ तो उसे दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉ. साधना अग्रवाल ने इलाज के दौरान बच्ची में ऑस्टियोजेनिक सकोरमा बीमारी पाई। इसका इलाज मुंबई में ही संभव होने पर टाटा मेमोरियल अस्पताल भेजा गया, जहां बच्ची गत वर्ष 9 मार्च से भर्ती है।
दिल्ली की डॉक्टर के जरिए मुंबई में आसरा
करीब साढ़े सोलह हजार रुपए तनख्वाह के पाइंदार मिश्रा लंबे समय से ड्यूटी नहीं कर पा रहे। अपनी सारी जमा पूंजी बच्ची के इलाज में खर्च कर चुके हैं। मुंबई में डॉ. अग्रवाल व उनके पति व मित्रों की मदद से आसरा मिला। रहने खाने की व्यवस्था नासिक निवासी बिल्डर अजय जैन ने की, लेकिन संपूर्ण इलाज के लिए परिवार धन नहीं जुटा पा रहा।
मां भी दो बार पॉजिटिव
मिश्रा ने बताया कि उनकी पत्नी गत एक वर्ष में मुंबई में दो बार पॉजिटिव आ गई। कई दिन तक उनकी पत्नी को मुंबई में समाजसेवियों के दिए फ्लैट में क्वॉरंटाइन रहना पड़ा। मिश्रा ने अस्पताल में दिन-रात बिता बिटिया का ध्यान रखा। मिश्रा के पास सवा लाख रुपए थे, जो सारे खर्च हो गए। अब आर्थिक संकट ने परिवार को नई चिंता में डाल दिया है।
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