इस बार मानसून पर नहीं मढ़ सकते आरोप!

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फैक्ट फाइल

- 3 घंटे देखा सडक़ों का हाल

- 23 किमी का सफर

- 90 से ज्यादा स्थानों पर सडक़ें उधड़ी मिली

- 10 से ज्यादा ऐसे स्पॉट जहां हादसों की प्रबल आशंका

जोधपुर. हर बार मानसून पर सबसे बड़ा आरोप लगता है सडक़ें तोडऩे का। लेकिन इस बार तो मानसून की ऐसी बरसातें हुई ही नहंीं कि उसके सिर पर आरोप मढ़ा जा सके। लेकिन फिर भी शहर की स्थिति काफी खराब है। पिछले कई दिनों से सडक़ों की वजह से होने वाले हादसों की शिकायतें मिल रही थी। इस पर पत्रिका टीम ने अलग-अलग क्षेत्रों में करीब 23 किमी का सफर किया और सडक़ों की बदहाली सामने आई।

आंखों देखी 1 : पाल रोड: हो सकती है अनहोनी

पाल रोड से जैसे ही सफर शुरू होता है आपको हर 200-300 मीटर पर उधड़ा हुआ डामर ब्रेक लगाने पर मजबूर कर देता है। प्रमुख चौराहा 12वीं रोड पर यदि संभल तक नहीं चले तो अनहोनी भी हो सकती है। इतना ही नहीं। आगे पांचवी रोड की प्रमुख सडक़ की अपनी बदहाली की दास्तां कह देगी। अपनी मस्ती में यदि आप वाहन चला रहे हैं तो दुपहिया वाहन से नीचे भी गिर सकते हैं।

आंखों देखी 2 : सरदारपुरा: गड्ढे आपको पहुंचा सकते हैं अस्पताल

सबसे व्यस्त बाजार में से एक सरदारपुरा। जलजोग सर्किल से सी रोड की ओर से प्रवेश करते ही बड़ा सा गडढा आपका स्वागत करेगा। आगे कुछ छोटी बड़ी मुसीबतें आएगी। लेकिन बी रोड पर उधड़ा हुआ डामर और बीच सडक़ एकदम से स्पीड ब्रेकर बने गड्ढे आपको अस्पताल भी पहुंचा सकते हैं।

आंखों देखी 3 : परकोटा शहर: धीमी रफ्तार से चलेगा वाहन

मजेदार बात परकोटा शहर में देखने को मिलेगी। सोजती गेट से त्रिपोलिया बाजार में प्रवेश करेंगे तो मजाल है कि 5 किमी से ज्यादा की रफ्तार से गाड़ी चला सकें। यह यातायात के कारण नहीं बल्कि हमारी सडक़ों की बदहाली के कारण है। यहां तो आपने गड्ढों की बजाय सपाट सडक़ गिन ली तो खूबी होगी।

आंखों देखी 4 : मेड़ती गेट: यहां नहीं बदलती किस्मत

कई क्षेत्राधिकारों के बीच बंटी मेड़ती गेट से हाथीराम ओडा और फिर गुलाब सागर-उम्मेद चौक तक की सडक़। न जाने कितने मानसून आए और चले गए। कितने अधिकारी भी दौरा कर गए। इसकी किस्मत नहीं बदल पाए। अगर कोई स्वस्थ आदमी है और लगातार कुछ दिन तक दुपहिया वाहन से यहां से सफर कर ले तो पीठ दर्द निश्चित है।

आंखों देखी 5 : सुरपुरा बाइपास: सडक़ चलने लायक ही नहीं

चलो शहर की सडक़ से इतर बाहर क्षेत्र लें तो वहां भी स्थिति खराब है। मंडोर क्षेत्र के आंगणवा और सुरपुरा बाइपास सडक़ तो चलने लायक ही नहीं है। यहां वाहन हिचकोले खाते ही चलता है।

जिम्मेदारी इनकी
- सार्वजनिक निर्माण विभाग पेचवर्क के टेंडर जारी करता है, इस बार सितम्बर माह में यह जारी होंगे।

- नगर निगम क्षेत्र की सडक़ों की मरम्मत खुद दोनों निगम अपने बजट से करवाएंगे।
- जेडीए क्षेत्राधिकार की सडक़ें व कुछ हस्तांतरित सडक़ों का सुधार जेडीए के हाथ।

- प्रमुख मार्ग पीडब्ल्यूडी एनएच के पास है, अभी बजट का इंतजार है।



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