जिले के अधिकांश क्षेत्र में बारिश नहीं, फसलों का बचना मुश्किल

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जोधपुर
मानसून मेहरबान नहीं होने से सबसे ज्यादा असर मारवाड़ की खेती पर पड़ रहा है। जिले के अधिकांश क्षेत्र में बरसात नहीं है। मौसम विभाग की भविष्यवाणी के हिसाब से सितम्बर के पहले सप्ताह तक बारिश के आसार नहीं है, इसके कुछ दिन बाद मानसून राजस्थान से विदा ले लेगा। ऐसे में पश्चिमी राजस्थान में अकाल के हालात बन गए है। ऐसे में कृषि विभाग की ओर से तय लक्ष्य के अनुरूप बुवाई नहीं हो पाई और अब शेष लक्ष्य पूरा होना भी मुश्किल नजर आ रहा है। विभाग के अनुसार, बुवाई लक्ष्य 12.55 लाख हैक्टेयर के मुकाबले जिले में 11.44 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई है । वहीं क्षेत्र के किसानों के अनुसार करीब 10 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई है। जोधपुर, बाड़मेर, जैसलमेर, जालोर जिलों में 50 से 70 प्रतिशत बुवाई हुई थी लेकिन बारिश नहीं आने से अधिकांश फसलें जल गई है। वहीं दो दिन पूर्व क्षेत्र में हुई बारिश से शेष बची फसलों को आंशिक राहत मिली है। इनमें भी कुछ फ सलों के पूरी तरह नष्ट होने का खतरा मंडरा रहा है।
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बारानी क्षेत्र में 15 लाख हैक्टेयर में बोई फसलों पर संकट
पश्चिमी राजस्थान के इन जिलों में बारानी क्षेत्र में मुख्यत बाजरा, ग्वार, मूंग, मोठ, तिल की खेती होती है। इन जिलों का खरीफ फ सलों का सामान्य रकबा 48 लाख हैक्टेयर के लगभग होता है। जिसमें से 20 लाख हैक्टेयर सिंचित क्षेत्र है वहीं शेष 28 लाख हैक्टेयर बारानी क्षेत्र है, जहां वर्षा आधारित खेती होती है। इस बार मानसून कमजोर होने से बारानी क्षेत्र में लगभग 15 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हो सकी। इसमें से भी अधिकतर फ सलें नष्ट हो गई है और शेष जलने के कगार पर है। सिंचित क्षेत्र की कपास, मूंगफ ली, अरंडी, मूंग आदि फ सलों की स्थिति भी खराब है।
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बुवाई लक्ष्य व प्राप्ति एक नजर में
फसल-- लक्ष्य हैक्टेयर में--- प्राप्ति हैक्टेयर में
बाजरा-- 400000--333400
मूंग-- 302000-- 279400
मोठ-- 90000-- 68000
ज्वार-- 40000-- 39500
तिल-- 28000-- 23600
अरण्ड़ी-- 23000-- 20800
मूंगफली-- 156000-- 158000
कपास-- 65000-- 70000
ग्वार-- 135000-- 136000
अन्य-- 16000-- 16000
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कुल-- 1255000-- 1144700
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बारिश कम होने से जिले में फसलें प्रभावित हुई है। ऐसे में अब किसानों को कम अवधि व कम पानी लेने वाली फसलों पर कार्य करना चाहिए।
डॉ जेआर भाखर, उप निदेशक
कृषि विस्तार जोधपुर



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