चातुर्मासकाल में भगवान विष्णु की योग निद्रा इस बार 118 दिन की

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NAND KISHORE SARASWAT

जोधपुर. देवशयनी एकादशी को चातुर्मास आरंभ होने पर इस बार 20 जुलाई से 15 नवम्बर 2021 तक मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। चातुर्मास के दिनों में खरीदारी, लेन-देन, निवेश, नौकरी और बिजनेस जैसे नए कामों की शुरुआत के लिए शुभ मुहूर्त रहेंगे। ज्योतिषीय मान्यतानुसार चातुर्मास काल के दौरान विवाह और महत्वपूर्ण शुभ कार्य निषेध माने गए है। इस बार देवशयन 3 महीने 26 दिन तक याने 118 दिन का रहेगा।

भगवान विष्णु 118 दिन योग निद्रा में
इस साल भगवान विष्णु 118 दिन योग निद्रा में रहेंगे। पिछले साल पुरुषोत्तम मास होने से भगवान विष्णु ने 148 दिन क्षीरसागर में शयन किया था। इस बार वे 20 जुलाई से 14 नवंबर तक योग निद्रा की अवस्था में रहेंगे। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक इस अवधि में सृष्टि को संभालने और कामकाज संचालन का जिम्मा भगवान शिव के पास रहेगा। इस दौरान धार्मिक अनुष्ठान किए जा सकेंगे लेकिन विवाह, यज्ञोपवीत संस्कार, गृहप्रवेश आदि मांगलिक कार्य नहीं होंगे। श्रीहरि विष्णु के योग निद्रा के दौरान मांगलिक कार्यों में उनका आशीर्वाद प्राप्त नहीं हो पाता है। चातुर्मास के दौरान शिव आराधना का भी बहुत महत्व है। सावन का महीना भी चातुर्मास में ही आता है। इसलिए इस महीने में शिव की आराधना शुभ फल देती है। चातुर्मास की शुरुआत हिंदू कैलेंडर के आषाढ़ माह से होती है। इस बार चातुर्मास मंगलवार 20 जुलाई से शुरू होकर 15 नवम्बर कार्तिक शुक्ल एकादशी तक रहेगा।

देवशयनी एकादशी पर शुभ संयोग
ज्योतिषाचार्य पं. अनीष व्यास के अनुसार इस साल देवशयनी एकादशी के दिन शुक्ल और ब्रह्म योग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस योग में किए गए कार्यों में सफलता और मान सम्मान की प्राप्ति होती है। चातुर्मास में मांगलिक कार्य टालकर खरीदारी, लेन-देन, निवेश, नौकरी और बिजनेस जैसे नए कामों की शुरुआत के लिए शुभ मुहूर्त रहेंगे।



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