जोधपुर. ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहे जोधपुर के अस्पतालों के लिए शनिवार को भारतीय वायुसेना आगे आई। वायुसेना के मालवाहक जहाज सी-17 ग्लोबमास्टर से सुबह खाली दो गैस टैंकर एयरलिफ्ट करके जामनगर स्थित ऑक्सीजन गैस प्लांट ले जाए गए। एक टैंकर 20 और दूसरा 15 टन का था। दोनों टैंकर रविवार दोपहर 12 बजे तक जोधपुर पहुंच जाएंगे। वैसे इस समय जोधपुर में हर रोज करीब 41 टन ऑक्सीजन की डिमाण्ड है लेकिन एक साथ 35 टन आ जाने से सिलेण्डरों पर दबाव कम हो जाएगा और वे आसानी से भरकर फिर से स्टोर किए जा सकेंगे।
एक मरीज को चाहिए 2 से ढाई सिलेण्डर
जोधपुर में वर्तमान में 4500 सिलेण्डर ऑक्सीजन की प्रतिदिन डिमांड बनी हुई है। करीब 1700 मरीज ऑक्सीजन पर भर्ती हैं। प्रत्येक मरीज को 7 क्यूबिक मीटर के दो से ढाई सिलेंडर प्रतिदिन चाहिए।
3 से 5 दिन में ठीक, 98 प्रतिशत तक की घर वापसी
शहर के अस्पतालों में भर्ती अधिकांश कोविड रोगियों के फेफड़ों में संक्रमण होने के कारण उन्हें ऑक्सीजन की दरकार होती है। अधिकांश रोगी 3 से 5 दिन में ऑक्सीजन लेकर स्वस्थ हो जाते हैं। दवाइयों का कोर्स भी इतने दिन का ही है। करीब 95 से 98 प्रतिशत मरीज की घर वापसी हो रही है।
पांच तरह से अस्पतालों में दी जा रही ऑक्सीजन
1 नेजल प्रोब- इसमें मरीज के नाक के दो नलियां रखी होती है।
2 वेंटी मास्क- मुंह पर मास्क लगा होता है।
3 हाई फ्लो ऑक्सीजन मास्क- मास्क के पास एक थैली लगी होती है। इमसें ऑक्सीजन का प्रेशर बढ़ जाता है। वेंटी मास्क पर जहां एक सिलेण्डर की खपत होती है वहीं हाई फ्लो पर दो सिलेण्डर की।
4 एनआईवी- ऑक्सीजन सेचुरेशन लगातार गिरने पर मरीज को एनआईवी यानी नॉन इनवेसिव वेंटिलेटर पर डाला जाता है। इसमें प्रेशर अधिक होता है। फेफड़ों को ऑक्सीजन लेने के लिए बाध्य किया जाता है।
5 वेंटिलेटर- इसमें फे$फड़ों में एण्डो ट्रेक्यिल ट्यूब डाली जाती है। यह अंतिम स्टेज है।
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किस ऑक्सीजन पर कितने मरीज
ऑक्सीजन तकनीक---- मरीज (प्रतिशत में)
नेजल प्रोब------------ 22
वेंटी मास्क ------------ 28
हाई फ्लो ऑक्सीजन------20
एनआईवी ------------ 18
वेंटिलेटर ------------ 12
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ऑक्सीजन की कहां-कितनी डिमाण्ड
अस्पताल ------ सिलेण्डरों की संख्या
एमडीएम ------ 1800
एमजीएच ------ 850
एम्स ------ 470
उम्मेद ------150
निजी अस्पताल ------1300
(यह अनुमानत: संख्या है। मरीजों के अनुसार प्रतिदिन बदल रही है। शहर में केवल एमजीएच, एमडीएम और एम्स में ही लिक्विड ऑक्सीजन के प्लांट है। एमजीएच में 10 टन, एमडीएम में 20 टन और एम्स में 10 व 20 टन के दो प्लांट है। निजी अस्पताल में कहीं नहीं है।)
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‘अधिकांश रोगी 3 से 5 दिन के बाद ऑक्सीजन लेकर स्वस्थ होकर घर लौट रहे हैं। फेफड़ों में अधिक संक्रमण होने पर ही मशक्कत करनी पड़ती है।’
-अरविंद अपूर्वा, ऑक्सीजन आपूर्ति प्रभारी, महात्मा गांधी अस्पताल जोधपुर
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