मारवाड़ का पुदीना देश के महानगरों में खशबू बिखेर रहा है

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राजेन्द्रसिंह दूदौड़

जोधपुर. मारवाड़ का किसान खेती-किसानी में नये नये नवाचार कर हाइटेक हो रहा है। मारवाड़ की जलवायु, तापमान व मिट्टी पुदीना की खेती के लिए वरदान साबित हो रही है। यही कारण है कि मारवाड़ के किसान अब पुदीना की खेती-बांडी शुरु की है। जिले के तिवंरी क्षेत्र में अब किसान पुदीना फसल की खेती कर लाखों रुपए की कमाई कर रहे है। मारवाड़ का पुदीना देश के महानगरों में खुशबू बिखेर रहा है। किसानों को 50 से लगाकर 100 रुपए प्रति किलो के दाम पुदीना के मिल रहे है। दूसरी फसलों के मुकाबले में किसानों को पुदीना की फसल में ज्यादा मुनाफा हो रहा हैं। एक बीघा में 40 से 50 हजार रुपए की आयपुदीना की फसल की एक बार रोपाई होने के बाद दो साल तक इसकी पैदावार आती है। एक साल में किसान करीब दस बार पुदीना फसल की कटाई करता है। एक बीघा में 20 से 25 क्विंटल पुदीना की पैदावार होती है। किसान को एक बीघा में 40 से 50 हजार रुपए की आय आसानी से हो जाती है। 500 किसान खेती कर रहे हैतिवंरी क्षेत्र में बड़ा काटेचा, बलारवा, बिजवाडिय़ा तिवंरी, रामपुरा सहित दर्जनों गांवों में किसान पुदीना फसल की पैदावार ले रहे है। क्षेत्र में करीब 500 किसान पुदीना फसल की खेती कर रहे है। पुदीना की फसल पहाड़ी क्षेत्र में होती थी। लेकिन अब यह मारवाड़ क्षेत्र में भी खेती होनी शुरु हो गई है। 50 से 100 रुपए प्रति किलो के दाम मिल रहे हैकिसानों को सूखा पुदीना के दाम बाजार में अलग अलग समय में 50 से लगाकर 100 रुपए प्रति किलो के दाम मिल रहे है। गीला पुदीना के 4 से लगाकर 8 रुपए प्रति किलो के दाम मिल रहे है। किसानों के सीजन के मुताबिक बाजार में दाम मिलते है। दूसरी फसलों के मुकाबले में अच्छे दाम मिलते हैदूसरी फसलों के मुकाबले में पुदीना फसल में किसानों को ज्यादा दाम मिलते है। किसान को एक बीघा जमीन में पुदीना की फसल से आसानी से 40 से 50 हजार रुपए की आय हो जाती है। यह फसल पहले पहाड़ी क्षेत्र में होती थी। लेकिन अब मारवाड़ में भी होनी शुरु हो गई है। जब्बरसिंह, किसान बड़ा कोटेचा जोधपुरपुदीना की खेती में किसानों को अच्छा मुनाफा मिल रहा हैदूसरी फसलों के मुकाबले में पुदीना की फसल में किसानों को अच्छा मुनाफा मिल रहा है। यह पहले उदयपुर के पहाड़ी क्षेत्र, गुजरात व महाराष्ट्र में होती थी। लेकिन अब पुदीना की खेती मारवाड़ में भी होनी शुरु हो गई है। इन्दरसिंह संचेती, संयुक्त निदेशक उद्यान विभाग जोधपुर



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