जोधपुर।
जोधपुर डिस्कॉम के अभियंता जिन्हें किसी न किसी मामले में आरोपी मानकर आरोपपत्र दिए गए। कई मामलों में 8 से 10 साल हो गए और अभियंता उनके जवाब भी दे चुके। लेकिन इसके बावजूद डिस्कॉम प्रबंधन इन आरोप पत्रों को निस्तारित नहीं कर पा रहा है। इसी कारण करीब 600 अभियंताओं के सेवालाभ और पदोन्नतियां प्रभावित हो रही हैं। इसी को लेकर बिजली इंजीनियर्स एसोसिएशन ऑफ जोधपुर डिस्कॉम बेजोड़ ने विरोध प्रदर्शन की रूपरेखा बनाई है।
बेजोड़ के अध्यक्ष मांगीलाल बेंदा ने बताया कि आरोप पत्रों का निस्तारण करने के लिए गाइडलाइन बनी है। हाईकोर्ट ने भी इसमें निर्देश दे रखे हैं। माइनर चार्जेज पर छह माह और मेजर चार्जशीट को एक साल में निस्तारित करना होता है। यदि कोई अभियंता दोषी पाया जाता है तो उस पर भी कार्रवाई कर मामले को निस्तारित किया जाना चाहिए। लेकिन पिछले कई वर्षों से ऐसे चार्जशीट के मामले में न तो दोषियों पर कार्रवाई हो रही है और न ही सम्पूर्ण निस्तारण हो रहा है। इसी कारण अभियंताओं में रोष व्याप्त है और उनकी पदोन्नतियां तक रुकी हुई।
अतिरिक्त प्रभार पर अधिकारी
बेंदा ने बताया कि राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग ने अगस्त 2020 में आदेश दिए थे कि प्रत्येक डिस्कॉम में मुख्य सुरक्षा अधिकारी व मुख्य ट्रेनिंग अधिकारी की अलग से नियुक्ति होनी चाहिए। अजमेर व जयपुर डिस्कॉम में यह नियुक्ति हो चुकी है, लेकिन जोधपुर डिस्कॉम में अधिकारियों को अतिरिक्त चार्ज देकर इतिश्री कर ली गई है।
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