डिजिटल राह पर चले गांव और सरकार के बच गए 15 लाख!

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जोधपुर।
डिजिटल माध्यम के जरिये अब तक शहरी लोग ही अपनी बात कह पा रहे थे, लेकिन पहली बार जोधपुर से हुई पहल ने सरकार के न सिर्फ लाखों रुपए बचाए बल्कि प्रदेश में सराहना भी मिल रही है। यह प्रयोग है डिजिटल संवाद और रात्रि चौपाल के विकल्प ई-चौपाल। पहली बार अपने स्थान पर बैठे ही पिछले दो माह से में 7 सौ से अधिक ग्रामीणों की शिकायतों का समाधान करने का दावा किया गया है।

रात्रि चौपाल का कन्सेप्ट

राज्य सरकार के निर्देश पर जिला कलक्टर को माह में एक रात गांव में बितानी होती है। जिले के सभी बड़े अधिकारियों का डेरा लगता है। सभी की रुकने और चौपाल में आने वाले लोगों के खान-पान की व्यवस्था भी करनी होती है। इसके अलावा टेंट व अन्य व्यवस्थाओं में एक चौपाल में एक से दो लाख तक खर्च होते थे।

ऐसे बच गए लाखों रुपए
कोरोना के कारण भौतिक रूप से जनसुनवाई संभव नहीं हुई। ऐसे में रात्रि चौपाल का विकल्प ई-चौपाल चुना गया। एक गांव के लोगो के लिए संबंधित राजीव गांधी सेवा केन्द्र या ई-मित्र केन्द्र पर जुटाकर उनको जिला मुख्यालय पर बैठे अधिकारियों से रूबरू करवाया जाता है। अब तक जिले में 9 गांव इस प्रकार की सुनवाई से जुड़ गए हैं। सरकार का इसमें मामूली खर्च होता है। प्रशासनिक अमला भी परिवहन नहीं करता। ऐसे में औसत 15 लाख से अधिक का खर्च सरकार का इन चौपालों में बच गया है।

संवाद की भी सराहना

इसी प्रकार विभागवार संवाद के जरिये ग्रामीणों तक सरकारी योजनाएं पहुंचाई जा रही है। सोशल मीडिया का उपयोग किया जा रहा है। लेकिन इसमें भी सक्रिय रूप से जल्द ही ई-चौपाल की तर्ज पर जनभागीदारी होगी। जिससे अधिकारियों व जनता के बीच सवाल-जवाब हो सके।

ग्रामीणों के चक्कर भी मिटे
ई-चौपालों के जरिये जो 700 से अधिक शिकायतें निस्तारित की गई है उनके लिए इन ग्रामीणों ने अपने खर्च पर जिला मुख्यालय के चक्कर भी निकालने पड़ते। इनमें से कई लोग पहुंच भी नहीं पाते। लेकिन अब गांवों में भी सुनवाई होने से शिकायतें भी अधिक मिल रही है। एक चौपाल में 80 से 100 तक शिकायत लेकर लोग पहुंच रहे हैं।

फैक्ट फाइल
- 9 ई-चौपाल अब तक हुई

- 830 शिकायतें मिली
- 629 पहले की निस्तारित

- 149 चौपाल के बाद निस्तारित
- 36 मांगें ग्रामीणों जो कि सरकार को भेजी गई

अच्छा रेस्पांस है

ई-चौपाल का प्रयोग जब किया तो उसके पीछे सोच यह थी कि कोरोना काल में लोगों की समस्याए नहीं सुन पाए थे। अब यह सफल है और सैकड़ों शिकायतों की सुनवाई कर निस्तारण कर चुके हैं। संवाद के जरिये भी ऐसे ही डिजिटल माध्यम का उपयोग कर रहे हैं। प्रयास है कि गुड गवर्नेंस की दिशा में काम करते जाएं।
- इंद्रजीतसिंह, जिला कलक्टर जोधपुर।



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