जोधपुर. बच्चों को चर्म संबंधी बीमारियों से संरक्षण की मनौति से जुड़ा ऐतिहासिक शीतलाष्टमी मेला लगातार दूसरे साल भी नहीं होगा। पश्चिमी राजस्थान में लोकदेवता बाबा रामदेव मेले के बाद दूसरा सबसे बड़े शीतला माता मेले पर इस बार भी कोरोना का साया छाया रहेगा। मंदिर ट्रस्ट ने 4 अप्रेल को मेले का उद्घाटन समारोह स्थगित कर केवल ध्वजारोहण करने की घोषणा की है। दर्शनार्थियों के लिए कोविड-19 गाइडलाइन के साथ 24 घंटे मंदिर खुला रहेगा। नागोरीगेट के बाहर स्थित प्राचीन मंदिर में रंगरोगन की तैयारियां शुरू हो चुकी है।
उदघाटन समारोह नहीं होगा
शीतला माता मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष निर्मल कच्छवाह ने बताया कि शीतला माता मेले को लेकर जिला प्रशासन के साथ हुई बैठक में इस बार कोविड-19 को देखते हुए मेला मैदान में स्टॉल आवंटन की कोई योजना नहीं है। मंदिर ट्रस्ट की ओर से भी हर साल होने वाला उदघाटन समारोह नहीं होगा केवल ध्वजारोहण किया जाएगा। मंदिर गाइडलाइन के अनुसार 24 घंटे खुला रहेगा।
बन सकता है धार्मिक पर्यटन स्थल
हर साल शीतलामाता मेले में श्रद्धालुओं की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है लेकिन अतिक्रमण के मामले न्यायालय में विचाराधीन है। भविष्य को देखते हुए यदि अतिक्रमियों को बेदखल कर उनका पुनर्वास किया जाए तो विकास कार्य हो सकते है। मंदिर के पास काग ऋषि के प्राचीन कुएं का जीर्णोद्धार, मंदिर से सटी पहाड़ी पर उद्यान का विकास, शीतला मेला मैदान में अतिक्रमण, पहाडिय़ों में खनन तथा क्षेत्र की ऐतिहासिक कलात्मक छतरियों का जीर्णोद्धार हो तो मारवाड़ ही नहीं बल्कि देश के विभिन्न जगहों से आने वाले दर्शनार्थियों के लिए धार्मिक पर्यटन स्थल बन सकता है।
जोधपुर में होता है अष्टमी को शीतला पूजन
होली के बाद आने वाली अष्टमी तिथि के दिन घरों में भी शीतला माता, ओरी माता, अचपड़ाजी एवं पंथवारी माता का प्रतीक बनाकर पूजन किया जाता है। अधिकांश घरों में शीतलाष्टमी को रसोईघरों में पूर्ण अवकाश रखा जाता है। शीतला माता पूजन वैसे तो पूरे भारत में चैत्र कृष्ण पक्ष की सप्तमी को होता है लेकिन केवल जोधपुर में दूसरे दिन अष्टमी तिथि को मां शीतला का पूजन किया जाता है। मां शीतला के दरबार में 36 कौम और वर्ग के श्रद्धालु शीश नवाने पहुंचते है।
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