बर्ड फ्लू की आशंका बनी प्रवासी पक्षियों के लिए खतरे की घंटी

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जोधपुर. शीतकाल में राजस्थान प्रवास पर आने वाले पक्षियों के लिए एवियन इन्फ्लुएंजा जैसा वायरस खतरे की घंटी बन सकता है। पक्षी विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते सावधानी नहीं बरती गई तो प्रवासी पक्षियों को खतरा हो सकता है । बर्ड फ्लू तेजी से फैलता है तो विशेष रूप से जोधपुर और आसपास क्षेत्रों में बेहद चिंताजनक स्थिति बन सकती हैं । जिले का आसपास सभी गांवों में मिलाकर करीब ३० हजार से अधिक कुरजां डेरा डाले हुए हैं। इनमें अकेले खींचन में २५ हजार कुरजां है। जिले में जहां जहां भी कुरजां को दाना डाला जाता हैं वहां अक्सर कौओं का हस्तक्षेप रहता ही हैं, जो चिंता का विषय बन सकता हैं। ऐसे में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में मिल रहे मृत पक्षियों का निस्तारण सुरक्षात्मक ढंग से जरूरी है। मनुष्य उसे बिना सुरक्षा उपकरण व दस्तावेजों के छूने से वायरस का संक्रमण मनुष्य में फैलने का खतरा भी है। सोमवार को खींचन में एक कुरजां मृत मिलने से हडक़म्प मच गया लेकिन जांच के बाद पाया गया कि कुरजां की मौत बिजली की तारों से टकराने से हुई थी।

अनुसंधान की जरूरत
सर्दियों में पक्षी कई प्रकार से प्रभावित होते हैं उसमें बैक्टीरियल इनफेक्शन फूड टॉक्सिसिटी और तापमान में अत्यधिक गिरावट भी कुछ कारण हो सकते हैं ऐसे में हर बार सर्दियों में राजस्थान में होने वाले इस प्रकार पक्षियों की मृत्यु का ठोस बुनियादी कारणों पर अनुसंधान की जरूरत है। यदि बर्ड फ्लू है तो किन पक्षियों से प्रवास के दौरान आता है या किन्हीं इकोलॉजिकल कारणों से इस समय प्रदर्शित होता है।

मनुष्य में फैलने का खतरा
राजस्थान में मरने वाले पक्षियों में मुख्यता ग्राउंड बर्डस है जिसमें एवियन बॉटूलिस्म की भी संभावना है । कुछ पक्षियों के विसरा जांच भोपाल में हुए जिसमें एवियन इनफ्लुएंजा भी पाया गया है। इससे यह जाहिर है की पक्षियों में इसका फैलाव हो रहा है । जोधपुर में कौओं का लगातार मरना भी इसी के कारण हो सकता है यदि एवियन इनफ्लुएंजा पक्षियों में होगा तो फैलने की संभावना अधिक हो जाती है।
डॉ. हिम्मत सिंह, बर्ड विशेषज्ञ व वरिष्ठ वैज्ञानिक राजस्थान

समूह में रहने वाले पक्षियों की सुरक्षा हो
जो पक्षी समूह में ही रहना पसंद करते है जैसे कुरजां, रोजी स्टरलिंग,रफ ,गिद्ध, इग्रेट, कोरमोरेंट में भी बर्ड फ्लू तेजी से फैलने की संभावनाएं अत्यधिक हो जाती हैं। जो कबूतरों को दाना नियमित रूप से डालने जाते हैं वे कुछ दिन पक्षियों से दूरी बनाए रखें। ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोग कुछ समय वेटलैंड्स और तालाबों से भी दूरी रखे।
- शरद पुरोहित,पक्षी व्यवहार विशेषज्ञ

मनुष्य में मिलते हैं ये लक्षण
एच 5 इन्फ्लुएंजा मनुष्य को भी प्रभावित करते हैं। इस वायरस के तीन स्टेन है जिसमें एच 5एन 1, एच 7 एन 7, एच 9 एन2 हो सकते हैं। जब मनुष्य संक्रमित जंतु या बर्ड्स के संपर्क में आते है तो यह बीमारी फैलने लगती हैं। इस बीमारी में मनुष्य के सांस की बीमारी, निमोनिया, बुखार आदि आने लग जाते हैं।
डॉ. दाऊलाल बोहरा, पक्षी विशेषज्ञ



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