जोधपुर के मास्टर प्लान से कहीं गायब ही ना हो जाए वनभूमि

पोस्ट पसंद आये तो लाइक जरुर करे ?

जोधपुर. शहर के समीपस्थ वनक्षेत्रों की 40 से अधिक खसरों की वनभूमि को नगर निगम की ओर से खुद के स्वामित्व दर्शाने पर वनविभाग ने जिला कलक्टर को पत्र लिखकर आपत्ति दर्ज कराई है। जोधपुर की लाइफ लाइन माने जाने वाली वनभूमि पर पहले ही 500 से अधिक हेक्टेयर पर कब्जा हो चुका है। ऐसे में तैयार हो रहे शहर के मास्टर प्लान से ग्रीन बेल्ट पूरी तरह गायब होने पर शहर के पर्यावरण पर प्रतिकूल असर हो सकता है। साथ ही वन संरक्षण अधिनियम 1980 की भी खुली अनदेखी और राज्य वननीति के तहत 20 प्रतिशत क्षेत्र ग्रीन बेल्ट के रूप आरक्षित रखने के आदेश भी कागजी साबित होंगे। वन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की गैर वानिकीय गतिविधियां निषेध होने के कारण कोई भी एजेन्सी विकास योजना को बिना भारत सरकार की अनुमति के प्रस्तुत नहीं कर सकते है।

डीम्ड फॉरेस्ट पर कॉलोनियां
सर्वोच्च न्यायालय के 12 दिसम्बर 1996 के आदेश में यह स्पष्टत अवधारित किया गया जा चुका है कि जिन भूमियों पर 200 पेड़ प्रति हेक्टेयर से अधिक घनत्व की वनस्पति विद्यमान है उस भूमि को 'वनÓ ( डीम्ड फॉरेस्ट) के रूप व्यवहारित किया जाएगा भले ही वह भूमि नोटिफाइड नहीं हो। अब इसी डीम्ड फॉरेस्ट में आवासन मंडल की ओर से बड़ली क्षेत्र में आवासीय योजना विकसित की जा रही है।

अमल दरामद का काम लंबे अर्से से ठप

वनविभाग जिला प्रशासन एवं उच्च अधिकारियों से निरन्तर विभाग के पक्ष में अमल दरामद कर वनभूमियों को रक्षित वन क्षेत्र घोषित करने के लिए सालों से निरन्तर कह रहा है । जिला प्रशासन के अधिकारियों की अनदेखी से शहर के आसपास वन भूमि पर अतिक्रमण धड़ल्ले से बढ़ता जा रहा है। वनविभाग लंबे अर्से से जेडीए व निगम के क्षेत्राधिकार में आने वाले समस्त वन क्षेत्रों में किसी भी तरह के गैर वानिकी विकास कार्य प्रस्तावित नहीं करने को कह चुका है।

वन अधिकारी का कहना है
वनभूमि पर नगर निगम की ओर से कुछ खसरों पर स्वामित्व दर्शाने के मामले में हमने जिला कलक्टर से शिकायत कर निरस्त करवाने की मांग की है। जो खसरे वनविभाग के नाम पर दर्ज है वे वन संरक्षण अधिनियम के तहत केवल डायवर्जन से ही चेंज हो सकते है। वनभूमि के वर्तमान वैधानिक अस्तित्व के अनुरूप कार्रवाई की जाएगी।

सुनिल कुमार, सहायक वन संरक्षक जोधपुर.

ग्रीन बेल्ट पर कोई विकास योजना ना हो
शहर की लाइफ लाइन माने जाने वाले ग्रीन बेल्ट, वनभूमि, तालाब के बहाव क्षेत्र पर किसी भी तरह की कोई रिहायशी योजना नहीं होनी चाहिए। वनविभाग और प्रशासन की लापरवाही से शहर के आसपास करीब 500 हेक्टेयर वनभूमि पर कब्जे हो चुके है और यह निरंतर बढ़ते जा रहे है।

रामजी व्यास, अध्यक्ष आध्यात्मिक क्षेत्र पर्यावरण संस्थान जोधपुर।



from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/2KGG327
Share on Google Plus

About Atul

This is a short description in the author block about the author. You edit it by entering text in the "Biographical Info" field in the user admin panel.

0 comments:

Post a Comment