नंदकिशोर सारस्वत
जोधपुर. संभाग मुख्यालय जोधपुर के तीन सबसे बड़े अस्पतालों और एम्स में हर साल करीब 30 से 40 हजार यूनिट रक्त की आवश्यकता होती है जिसमें से करीब 60 से 70 प्रतिशत जरूरत की पूर्ति अपणायत के शहर सूर्यनगरी की करीब 100 से अधिक सामाजिक धार्मिक संस्थाओं के रक्तदान शिविरों के माध्यम से होती है। जोधपुर की ऐसी कई संस्थाएं है जो नियमित रूप से रक्तदान के लिए सक्रिय है। ऐसे ही कुछ संस्थाओं के प्रतिनिधियों से पत्रिका ने बातचीत की जो लगातार सक्रिय रहकर न केवल खुद रक्तदान करते है बल्कि औरों को भी रक्तदान के लिए प्रेरित करते है।
91 बार कर चुके है रक्तदान.
वर्ष 1995 से लगातार 91 बार रक्तदान कर चुका हूं। करीब 203 रक्तदान शिविरों का आयोजन कर 6490 यूनिट ब्लड बैंकों को सौंपा है। कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन में भी जरूरतमंदों को लगातार रक्त व प्लाजमा उपलब्ध करवाने के लिए पांच शिविरों का आयोजन किया। वर्ष 1995 में मैं अपने परिचित से मिलने महात्मा गांधी अस्पताल गया तो वहां भर्ती मित्र के परिजन का निधन रक्त नहीं मिलने से हो गया। उस घटना मुझे झकझोर दिया। उसी दिन से मैंने प्रण किया की नियमित रूप से रक्तदान करता रहूंगा और दूसरों को भी प्रेरित करता रहूंगा। मुझे उस वक्त सबसे ज्यादा खुशी होती है जब मेरा रक्त किसी के काम आ रहा है।
तरूण कटारिया, अध्यक्ष, रक्तदान सेवा समिति
सड़क दुर्घटना में घायल दोस्त से मिली प्रेरणा .
अपने एक दोस्त की सड़क दुर्घटना होने पर जब खून की जरूरत पड़ी तब रक्तदान के महत्व का अहसास हुआ और उसी घटना से रक्तदान की प्रेरणा मिली और पांच दोस्तों के साथ मिलकर 'लाल बून्द जिंदगी रक्षक सेवा संस्थाÓ बना कर रक्तदान की मुहिम शुरू की। देखते ही देखते दस हजार युवा संस्था से जुड़ कर रक्तदान करने लगे है। संस्था के टोल फ्री नम्बर 18001212561 के माध्यम से जरूरतमन्दों को 24 घण्टे रक्त की व्यवस्था है। संस्थान की ओर से 12,000 से अधिक यूनिट रक्तदान हो चुका है व आपातकालीन स्थिति में प्रसूताओं इत्यादि मरीजो को प्लेट्लेट्स व्यवस्था करवाई जा रही है। कोरोना काल में भी 1000 यूनिट से ज्यादा रक्तदान करवाया गया।
-रजत गौड़, संस्थापक लाल बून्द जिंदगी रक्षक सेवा संस्था
खून की कमी से किसी के सिर से ना उठे माता पिता का साया.़
समय पर रक्त की व्यवस्था हो जाती तो शायद मेरे सिर से माता पिता का साया नहीं उठता। परिजनों व बड़े भाइयों से बचपन से लगातार सुनी यह बात दिल में घर कर गई और संकल्प लिया की रक्त की कमी से किसी जरूरतमंद को अपनी जान नहीं गंवानी पड़े। वर्ष2007 से अब तक 527 रक्तदान शिविरों के माध्यम से सरकारी अस्पतालों के रक्तकोष में हजारों यूनिट जमा कराया। अस्पतालों में ज्यादा रक्त की जरूरत होने पर 30 दिन से 60 दिनों तक लगातार रक्तदान शिविरों का तीन बार आयोजन किया।
-करणसिंह राठौड़, अध्यक्ष बाबा रामदेव समाज सेवा संस्था जोधपुर
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