जोधपुर. पुलिस कमिश्नरेट जोधपुर में महिलाएं, युवतियां व बच्चियां सुरक्षित नहीं हैं। न सिर्फ छेड़छाड़ बल्कि बलात्कार व बच्चों से दुराचार के मामले बढ़ रहे हैं। पुलिस के आंकड़ों को माना जाए तो हर तीन दिन में एक बलात्कार और रोजाना एक छेड़छाड़ होती हैं।
परिचित या पड़ोसी ही बन रहे हैवान
जोधपुर में बलात्कार के अनेक मामलों में आश्चर्यजनक रूप से परिचित अथवा पड़ोसियों में ही हैवान सामने आए हैं। खासकर श्रमिक वर्ग में अपनों के बीच ही बच्चियां सुरक्षित नहीं हैं। बासनी, बोरानाडा और शास्त्रीनगर थाना क्षेत्रों में बहला-फुसलाकर पड़ोसियों ने ही नाबालिगों से हैवानियत की थी।
आरोपियों पर चालान पेश तो एफआर भी लगाई
कमिश्नरेट में वर्ष २०१७ में बलात्कार के ७६ मामले दर्ज किए गए थे। ४१ मामलों में आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किए गए। १७ मामलों को झूठ मानकर एफआर लगाई गई। वर्ष २०१८ में बलात्कार के ८८ मामलों में से ५१ में चालान पेश किए गए और २१ मामलों में अदम वकू एफआर लगा दी गई थी। वर्ष २०१९ में बलात्कार के आंकड़े बढक़र १२१ पहुंच गए। इनमें से ६० मामलों में चालान पेश किए गए। वहीं, २८ एफआइआर को झूठ मान एफआर लगाई गई।
पुलिस ने तुरंत पकड़ा, कोर्ट से सजा भी मिले
कमिश्नरेट के पश्चिमी क्षेत्र में नाबालिग बलात्कार पीडि़ता के परिजन का कहना है कि पड़ोसी ने पुत्री को घर में बुलाकर छेड़छाड़ व दुष्कर्म किया था। रोती-बिलखती पुत्री ने घर लौटकर पूरी बात बताई थी। कभी सोचा तक नहीं था कि पुत्री के साथ ऐसे भी हो सकता है। पुलिस को सूचना दी तो तुरंत मौके पर पहुंची। आरोपी को पकडक़र थाने ले गई थी। समाज में बच्चियां ही सुरक्षित नहीं है। ऐसे बलात्कारियों को अदालत जल्द से जल्द सजा तक पहुंचाए। ताकि इन्हें देख दूसरों को सबक मिल सके।
बलात्कारी को फांसी की सजा मिले
बाइपास पर चौकीदारी का काम करने वाले बलात्कार पीडि़ता की मां का कहना है कि पुत्री को कमरे में बंद कर बलात्कार किया गया था। उसने पुत्री को कमरे से मुक्त कराया था। रोते-बिलखते नाबालिग पुत्री थाने पहुंची थी और पूरी जानकारी दी थी। तीन नाबालिग व दो युवकों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराई थी। पुलिस ने दो दिन में पांचों को पकड़ लिया था। ऐसे बलात्कारियों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए।
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