जोधपुर. हजरत इमाम हसन-हुसैन सहित करबला के शहीदोंं की याद में मातमी पर्व मोहर्रम रविवार को घरों में ही मनाया जाएगा। मोहर्रम की पूर्व संध्या पर शनिवार को शाम शाम-ए-गरीबां (कत्ल की रात ) अकीदत से मनाई गई। मोहर्रम एकता कमेटी के अध्यक्ष उस्ताद हाजी हमीम बक्स ने बताया की इस बार वैश्विक महामारी कोरोना के कारण सरकार व प्रशासन की गाइडलाइन पालना में आस्था के प्रतीक ताजिए मुकाम पर खड़े नहीं किए गए है और ना ही ढोल वादन और अखाड़ों का प्रदर्शन किया जाएगा। यौमे शहादत की याद में रोजा रखकर घरों में ही विशेष नफिल नमाजें पढ़ी जाएगी। मुस्लिम घोसी समाज जोधपुर की ओर से हर साल मोहर्रम पर हजारों लीटर दूध से निर्मित छबील का वितरण इस बार नहीं किया जाएगा। मोहर्रम एकता कमेटी ने अकीदतमंदों से मोहर्रम व फूल प्याला की धार्मिक रस्म घर पर ही रहकर मनाने की अपील की है।
घरों में रहकर ही अदा की जा रही धार्मिक रस्में
मोहर्रम एकता कमेटी के प्रवक्ता नदीम बक्ष ने बताया की शनिवार को सभी मोहर्रम लाईसेंसदारो ने अपने अपने घरो मे ही ताजिया मोहर्रम को रखकर मुक्तसर फ ातिया शीरीनी चढ़ाने की रस्म की पूरी की। कमेटी के सदर उस्ताद हाजी हमीम बक्ष ने बताया की सरकार की गाइडलाइन के अनुसार कोरोना महामारी को देखते हुए सिर्फ लाईसेंसदारो की ओर से घरों में रहकर ही मोहर्रम की सभी धार्मिक रस्में अदा की जा रही है। मोहर्रम एकता कमेटी के अध्यक्ष सहित अ वहीद खान उस्ताद सूबराती खान, उस्ताद रफ ीक कुरैशी, मंसूर खान, फ ारूक सोलंकी, फेजान बक्ष मौजूद रहे।
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