नंदकिशोर सारस्वत
जोधपुर. शहर में कई मंदिर ऐसे भी है जो शिल्प स्थापत्य कला की उन्नत परंपराएं मनमोहक रूप आकार से अपनी पहचान कायम किए हैं। इनमें पावटा उदय मंदिर मार्ग स्थित रसिक बिहारी का भव्य मंदिर है जो पूर्ण रूप से राजस्थानी वास्तु शैली के दर्शन कराता है। अधिकांश शहरवासी रसिक बिहारी मंदिर को नैनी बाई के मंदिर के नाम से भी जानते हैं। महाराजा जसवंत सिंह द्वितीय की पासवान नैनी बाई ने विक्रम संवत 1926 में मंदिर बनवाया था। रसिक बिहारी मंदिर 17 फुट आयताकार चबूतरे पर बना है।
इसमे छप्पन स्तंभ गर्भ गृह और परिक्रमा परिसर बनाया गया है। मंदिर का मुख्य द्वार तोरण द्वार कंगूरे मेहराब कलात्मक छतरियां तत्कालीन वास्तु कौशल को दर्शाती है । मंदिर में मूलतः श्री कृष्ण की ठाकुर जी की मूर्ति सहित झारखंड महादेव मंदिर भी है। मंदिर में विशाल नंदी बने हैं जो जोधपुर के दूसरे मंदिरों से बड़े हैं। मंदिर प्रांगण में जोधपुर के महाराजा की ओर से विशाल काम नंदी प्रतिमा को विक्रम संवत 1993 में भेंट किया गया था । नंदी के पास ही शिलापट्ट पर इसका वर्णन भी किया गया है। शिलालेख में कहा गया कि मरुधरधीशाधिपति महाराजा श्री तखत सिंह साहिब बहादुर पुत्र श्रीमान राज राजेश्वर महाराजाधीराज जसवंत सिंह साहिब बहादुर ने यह नंदीगण श्री झारखंड महादेव को भेंट किया। इसमे तारीख विक्रम संवत 1943 पौष बदी पंचमी बताई है।
वैसे तो इस मंदिर की गणना नगर के वैष्णव संप्रदाय के बड़े मंदिरों की श्रेणी में की जाती है । मंदिर में भगवान गणेश की दक्षिणा मुखी रिद्धि सिद्धि शुभ लाभ मूषक की अनूठी अखंड प्रतिमा है । मंदिर के कई कक्ष में वर्तमान में राजकीय कार्यालय संचालित किए जा रहे हैं। महर्षि दयानंद बलिदान की घटना से नन्ही भक्तन का संबंध काफी चर्चित रहा है । आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद परलोक वास में नन्ही भक्तन के षड्यंत्र के किस्से इतिहास में काफी चर्चा में रहे है।
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