जोधपुर. वैश्विक महामारी कोरोना ने वरिष्ठ नागरिकों की दशकों से चली आ रही परम्पराओं को तोडऩे के लिए मजबूर किया । मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारा जाकर पूजन, इबादत, प्रार्थना और अरदास करना छूट गया है। कोरोनाकाल में कई बुजुर्ग चिंता में डूबे खुद को नितांत अकेला और तनावग्रस्त महसूस करने लगे है तो जोधपुर शहर के कई ऐसे भी बुजुर्ग है जिन्होंने कोरोना लॉकडाउन का सदुपयोग कर अपने अनुभवों को हौंसले में बदला और रचनात्मक कार्यों से लॉकडाउन में अपनी खुद की नई दुनियां रच डाली।
केस-1
घर की छत पर ही उगा दी जमीन
इन्दिरा गांधी नहर परियोजना से सेवानिवृत्त सहायक अभियन्ता हापुदास वैष्णव और उनकी पत्नी पूर्व जिला परिषद सदस्य गोमती ने लॉकडाउन में अपने ही घर की छत पर ही सिजनेबल सब्जियां उगाने की ठान ली। संयोग से घर के अण्डरग्राउड में पानी को भरने के लिए मिट्टी मंगवाई गई थी। छत पर प्लास्टिक बिछाने के बाद एक फीट मिट्टी का लेवल और देशी खाद्य मिलाया और जुट गए खेती करने। देखते ही देखते आलु, टमाटर, मूली, तरबूज, खऱबूजे, काचर, पालक आदि मौसमी सब्जियां व फल तैयार हो गए। मटकी चौराहा के पास राजीव नगर डी सेक्टर निवासी वैष्णव दंपत्ति के घर की छत पर इन दिनों सीजनेबल सब्जियों का लाभ आस-पड़ोस के लोगों को भी मिलने लगा है।
केस-2.
पत्नी के प्रेरणास्पद कार्यों पर लिख डाली पुस्तक
लॉकडाउन के कारण नियमित दिनचर्या एकदम से बंद हो जाना मुश्किल भरा था । राईका बाग निवासी सत्तर वर्षीय डॉ. देवीलाल पंवार के मन में दो साल पहले दिवंगत धर्मपत्नी समाजसेविका डॉ. गोविन्दी पंवार के प्रेरणास्पद कार्यो और संर्घष को लेकर पुस्तक लिखने की इच्छा थी। लॉकडाउन ने अवसर दिया तो यह कार्य संभव हो सका। हालांकि उम्मेद उद्यान में करीब 20 दोस्तों के साथ सुबह की सैर, वो शेरो शायरियां, शहर और देश के हालात पर चर्चा, सुख दुख की बातें थम सी गई है। जिन चीजों, लोगों तथा परिस्थितियों को आप बदल नहीं सकते, उनके बारे में चिंता करना छोड़ देना चाहिए क्योंकि इससे लाभ तो नहीं सेहत का नुकसान जरूर होगा। उत्तम रहन सहन के लिए सही वातावरण स्वयं बनाना होगा।
केस-3....
नई पीढ़ी के लिए तैयार किया अध्यात्म का वातावरण
रातानाडा निवासी और दूरसंचार विभाग से सेवानिवृत्त लालसिंह चावड़ा ने लॉकडाउन अवधि में सभी पौराणिक ग्रंथों का अध्ययन कर अपने परिवार की नई पीढ़ी में धर्म अध्यात्म का वातावरण तैयार करने में जुटे है। अपने पोते -पोतियों से उन्होंने एंड्राइड फोन सहित कई नई तकनीकी भी सीखी। हालांकि स्वास्थ्य के लिए जरूरी नियमित रूप से सुबह की सैर, वरिष्ठ साथियों के साथ जीवन के अनुभवों पर हथाइयों पर होने वाली चर्चा और साप्ताहिक गोष्ठियां बाधित जरूर हुई है। लेकिन इन सब बाधाओं को पार करते हुए भी उन्होंने मन को मजबूत और मनोबल बनाए रखा। उनका कहना है कि यह परस्थितियां हमेशा नहीं रहनी है। लेकिन जो परिस्थितियां अभी है उसका सदुपयोग करना है। कोरोनाकाल में कुछ खोकर बहुत कुछ पाया भी है।
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