अभिषेक बिस्सा/जोधपुर. कोरोनाकाल ने काफी कुछ बदलाव ला दिया है। एक तरफ जहां निजी व सरकारी ऑफिसेज ऑनलाइन वर्क पर जोर दे रहे हैं तो दूसरी ओर घरों में पड़े सिंगल लैपटॉप-डेस्कटॉप व डबल मोबाइल बच्चों की स्टडी के लिए बुक हो गए है। ऐसे में अभिभावकों पर प्रेशर बढ़ गया है कि कोरोनाकाल के चलते आने वाले दिनों में उन्हें स्कूल की महंगी फीस के साथ बच्चों के लिए एक्सट्रा डेस्कटॉप, लैपटॉप व मोबाइल फोन खरीदने पड़ सकते है।
कई घरों में इन दिनों पापा व घर में अन्य वयस्क परिजनों के काम आने वाले सिस्टम स्कूली बच्चों की पढ़ाई का महत्वपूर्ण जरिया बने हुए हैं। शिक्षा पर बढ़ा खर्च कोरोनाकाल बेहद चिंताजनक है। इस कोरोनाकाल में कई अभिभावकों की नौकरी चली गई और किसी की सैलेरी आधी मिल रही है। इस बीच ऑनलाइन पढ़ाई के लिए बच्चों को लैपटॉप व नया मोबाइल दिलाना भी चुनौती बन गया है। घर में एक ही फोन, जो भी घर में पापा या मम्मी के अन्य कार्यों के लिए काम आ रहा है। ऐसे में अभिभावक भी चिंता में डूबे हुए हैं।
ज्यादा मोबाइल या लैपटॉप के आदि न होने दें
बच्चों को ऑनलाइन स्टडी के लिए मोबाइल व लैपटॉप देने का समय फिक्स कर दे। इसके बाद उन्हें न दे। इसकी बजाय टीवी पर घरेलू मनोरंजन के सीरियल, महापुरुषों की कहानियां सहित आदि देखने के लिए प्रेरित करें।
- डॉ. जीडी कूलवाल, वरिष्ठ आचार्य एवं विभागाध्यक्ष, मनोविकार विभाग, डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज
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