लॉकडाउन में बीच राह अटक गए हजारों प्रवासी,  अलग अलग फैसलों से राजस्थान आने की नही मिल रही अनुमति

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बेलवा. कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए लगाये गए लॉकडाउन में केंद्र व राज्यों की सरकारों द्वारा बार बार लिए जा रहे निर्णय के चलते अपने घर लौट रहे हजारों प्रवासियों को संकट में डाल दिया है। कर्नाटक से बेलगावँ से मिली जानकारी के अनुसार वहां से मजदूर राजस्थान आने के लिए राज्य सरकार के प्रवासियों को लाने के फैसले के बाद कर्नाटक सरकार से राजस्थान जाने की अनुमति के पास बनवा दिए। जिसके बाद कर्नाटक की सरकारी बसों के जरिये प्रवासियों को लाया जा रहा था, लेकिन इस बीच राजस्थान राज्य की सीमाओं के सीज होने की खबर आने के बाद कर्नाटक सरकार ने मजदूरों को बेलगांव में एक कॉलेज में रुकवा दिया।

मजदूरों ने बताया कि राजस्थान में सीमा सीज होने से जारी किए गए पास को भी रद्द कर दिया है। मजदूरों द्वारा मिन्नतें करने के बावजूद भी उनको अपने राज्य में नही पहुंचाया जा रहा है। वहां रह रहे प्रवासी लोगों ने बताया कि सुबह से शाम तक बस खाने के लिए चावल दिये जा रहे है, तो दूसरी और सैंकड़ों को एक साथ रखने से सोशल डिस्टेंसिंग की पालना नही होने से संक्रमण का खतरा बना हुआ है।

लोगों ने राजस्थान सरकार के खिलाफ विरोध जताते हुए कहा कि सरकार के बार बार जारी हो रहे आदेशों के चलते उनको कार्यस्थल और घर के बीच लाकर अटका दिया है। सीएम गहलोत अक्सर हर राजस्थानी को मैं थांसु दूर कोणी कहते नजर आते थे, लेकिन गहलोत के फैसले के बाद प्रवासियों को यह कहने पर मजबूर कर दिया कि थे मांसू दूर हो अशोक जी! अंतर्राज्यीय सीमाओं को सीज करने के आदेश के बाद राज्यों की सीमाओं पर हजारों प्रवासी असमंजस की स्थिति में अटके हुए है।

प्रवासियों की घर वापसी भी खतरा
इस वक्त पूरा देश कोरोना वायरस की चपेट में है, राज्यों व जिलों में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या दिनोदिन बढ़ रही है। ऐसे हालात में राज्यों की सरकारों द्वारा प्रवासियों को घर लाने के आदेश पर भी सवाल खड़े हो रहे है। उल्लेखनीय है कि राजस्थान सरकार द्वारा रोडवेज से प्रवासियों को लाने के बाद 12 मई से केंद्र सरकार स्पेशल ट्रेन भी संचालित कर रही है। ऐसे में दूसरे राज्यों से आ रहे प्रवासी लोगों के कार्यस्थल व सफर के दौरान संक्रमित होने का खतरा बना रहता है।

शेरगढ क्षेत्र के देवीगढ़ में पहला कोरोना पॉजिटिव जो कि महाराष्ट्र राज्य से घर आया था। रेडजोन क्षेत्रों से घर आने के बावजूद वे लोग सरकार की एडवाईजरी का पालन नही कर रहे है। पूर्व में सरकार ने जहां गांव गांव वैलनेस केंद्र स्थापित कर अन्य प्रदेशों से आ रहे प्रवासी लोगों को क्वारेंटन में रखा जाता था, लेकिन उन केंद्रों पर भी सब कुछ ऑल इज वेल नही था। वहां रह रहे लोग सुबह व रात्रि का भोजन घर से करके आते थे, जिससे संक्रमण बढ़ने का खतरा था।

अब सरकार ने नई गाइडलाइन के तहत बाहरी राज्यों से आ रहे लोगों को होम क्वारेंटन में रहने के लिए भी कहा है ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि गांवों के घरों में अलग से कमरा उन लोगों के लिए उपलब्ध नही होता है। अक्सर देखा गया है कि बाहर से आ रहे लोग अपने परिवार व पड़ोसियों के साथ हथाई करते नजर आते है। तो दूसरी तरफ इन मामलों में प्रशासन व पुलिस की सख्ती भी नही देखी जा रही है। ऐसे में कोरोना का खतरा और बढ़ सकता है।



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