जोधपुर. राजस्थान हाईकोर्ट ने मंगलवार को राज्य सरकार से पूछा कि कोविड-19 के प्रकोप के बीच करीब चौदह लाख प्रवासी श्रमिकों की घर वापसी को लेकर क्या कदम उठाए गए हैं। कोर्ट ने सरकार को जवाब पेश करने के लिए एक दिन का समय दिया है।
न्यायाधीश संगीत लोढ़ा तथा न्यायाधीश रामेश्वर व्यास की खंडपीठ में याचिकाकर्ता हरिसिंह राजपुरोहित की ओर से दायर याचिका की सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता पंकज शर्मा ने जवाब पेश करने के लिए समय मांगा, जिसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने अगली सुनवाई गुरुवार को मुकर्रर की है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता मोतीसिंह ने कोर्ट में कहा कि प्रवासी श्रमिकों के लिए राज्य सरकार ने 26 अप्रैल को गाइडलाइन जारी की थी। इसके बाद राज्य पोर्टल पर 14 लाख से अधिक प्रवासी श्रमिकों ने घर वापसी के लिए पंजीयन करवाया, लेकिन 30 अप्रैल से आज तक राज्य सरकार ने बड़े स्तर पर किसी भी तरह की परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की है।
उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के तृतीय चरण की अधिसूचना में कहा गया था कि किसी भी व्यक्ति के पास यदि अपना वाहन है, तो वह संबंधित जिला प्रशासन से एक स्थान से दूसरे स्थान या अंतर राज्य आवागमन के लिए और उसके अनुसार अनुमति प्राप्त कर सकता है। गुजरात महाराष्ट्र, कर्नाटक गोवा के विभिन्न जिला कलेक्टरों से हजारों लोगों को छूट मिली, लेकिन जब वे राज्य की सीमावर्ती जिलों की सीमा पर पहुंचे तो उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया।
अधिवक्ता ने कहा कि करीब 14 लाख प्रवासी श्रमिकों ने पंजीयन करवाया है, जिनके पास न तो दूसरे राज्य का कोई पारिवारिक कार्ड है और न ही वे खाद्य सुरक्षा की योजना से लाभान्व्ति हो पा रहे हैं। लाखों श्रमिक महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, गोवा और अन्य राज्यों में असहाय महसूस कर रहे हैं और वहां का प्रशासन भी उन प्रवासी श्रमिकों को सरकारी सहायता प्रदान करने में असमर्थ साबित हो रहा है।
याचिका में पंजीकृत प्रवासी श्रमिकों को योजनाबद्ध तरीके से उनके स्थायी आवास पर पहुंचाने, वैध अनुमति लेकर राज्य की सीमा तक पहुंचे लोगों को राज्य में प्रवेश देने, आवागमन व विश्राम के दौरान ऐसे श्रमिकों को भोजन-पानी व बुनियादी जरूरत की सामग्री मुहैया करवाने सहित व्यापक पैमाने पर रेल सेवाएं शुरू करने की मांग की गई है।
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