जोधपुर ( hindi news. jodhpur news in hindi ) . शहर की एडिशनल पुलिस सुपरिंटेंडेंट ( additional police superintendent ) सीमा हिंगोनिया ( Seema Hingonia ) का मानना है कि ( crime. crime news ) समाज लड़कियों को ज्यादा सुरक्षा देने ( women safety and security ) के लिए लड़कों को ज्यादा प्रतिबंधित करे। साथ ही पीडि़त बालिका या महिला के प्रति रवैया सकारात्मक और सम्मानजनक रखें। उन्होंने महिला सुरक्षा के मुद्दे पर पत्रिका से एक मुलाकात ( interview ) में यह बात कही। उन्होंने कहा कि बच्चियों को सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव, रैगिंग एक्ट और पॉक्सो एक्ट के बारे में भी जानकारी दी जाए। महिलाओं और युवतियों को यह पता होना चाहिए कि थानागाजी केस के बाद अब एसपी ऑफिस में एफआईआर दर्ज की जाती है। वर्तमान में उन्नाव व थानागाजी केस को देख कर कोई भी यह कह सकता है कि भारत में महिलाओं और बच्चियों की स्थिति बहुत दयनीय है। लोगों को लगता है कि सुरक्षा की दृष्टि से भारत निचले पायदान पर है। लेकिन एेसा नहीं है। कुछ अपवादों को छोड़ दें तो अच्छे उदाहरणों और सुरक्षा के इंतजामों को भी समझने की आवश्यकता है। मैं सेव यूथ सेव नेशन कैम्पेन के माध्यम से यूथ को अच्छी आदतें अपनाने और बुराइयों से दूर रहने के लिए प्रेरित करती हूं। साथ ही उन्हें कानूनों के बारे में जानकारी देती हूं। हर जगह एेसा होना चाहिए। ध्यान रहे कि सीमा हिंगोनिया सेव यूथ नेशन के तहत शहर के स्कूलों में 15000 बच्चों को जागरूक कर चुकी हैं।
गल्र्स और वीमन एेसे हो सेफ्टी एंड सिक्योरिटी
-सभी संस्थाओं और समाजों को मिलजुल कर सम्मिलित उपाय करने की जरूरत है। जैसे परिवार, समाज, स्कूल, कॉलेज, पुलिस, प्रशासन और न्यायिक व्यवस्था। बालिका या महिला सुरक्षा इन सभी संस्थाओं की सामूहिक जिम्मेदारी है कि वे घर परिवार, समाज व अन्य स्थानों पर सुरक्षात्मक माहौल उपलब्ध करवाएं। सभी अपनी अपनी जिम्मेदारियां समूझें। किसी दूसरे पर जिम्मेदारी न डालें। जैसे अक्सर कहते हैं कि पुलिस कुछ नहीं करती है।- पुलिस को एक्टिव हो कर काम करना चाहिए। अर्थात घटनाएं घटित होने से पहले ही सुरक्षात्मक उपाय करने चाहिए। साथ ही महिलाओं और बच्चियों के मामले में अति संवेदनशीलता अपनाते हुए त्वरित गति से कार्य करना चाहिए।- स्कूल वह संस्था है जहां बच्चियों के साथ-साथ बच्चों को भी पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ कानूनी शिक्षा, बचाव सजा आदि के बारे में जानकारी दी जाए।
बच्चियों या महिलाओं की सुरक्षा की पहली जिम्मेदारी परिवार की है। परिवार की ओर से उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाया जाए। परिवार के स्तर पर उनके साथ हो रहे सभी तरह के घटनाक्रमों के बारे में बोलना सिखाया जाए। उनके साथ लगातार संवाद कायम करें।
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/2sEmfnA
0 comments:
Post a Comment