जोधपुर.
शहर में बेकाबू डेंगू लोगों की जान लेने लगा है लेकिन सरकारी रिकार्ड में अब तक किसी मरीज की डेंगू से मौत नहीं हुई है। स्वास्थ्य विभाग तकनीकी पहलू की आड़ में डेंगू से हुई मौतों पर पर्दा डालने का प्रयास कर रहा है।
सरकारी व निजी संस्थानों में डेंगू के ज्यादातर मरीजों की जांच कार्ड टेस्ट से होती है। एलिजा टेस्ट नहीं होने से पहले मरीज की मौत होने पर चिकित्सा विभाग मौत की वजह अन्य बीमारी मान रहा है। इन नियम-कायदों के बीच कार्ड टेस्ट की आड़ में चिकित्सा विभाग डेंगू की मौतें छिपा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से मंगलवार को जारी रिपोर्ट में १५ नए मरीज डेंगू के मिले हैं। इनमें तीन सेंट्रल जेल के बंदी भी शामिल हैं। इन रोगियों से समेत ८ रोगी एमजीएच में भर्ती हैं। गौरतलब हैं कि इस साल डेंगू के ७६३ मरीज सामने आ चुके हैं। कार्ड टेस्ट पॉजिटिव वाले ४ रोगियों की मौत हो चुकी हैं। सीएमएचओ डॉ. बलवंत मंडा ने बताया कि जांच का कार्य सरकार के नियमों के तहत हो रहा है।
या फिर मौतें मानी जाए बुखार से
डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज में मंगलवार को भाजपा नेताओं के प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों ने कॉलेज प्रशासन से सवाल भी पूछा था कि यदि डेंगू से मौतें नहीं हुई है तो विभाग इन्हें बुखार से मौतें होना माने। एेसे में चिकित्सा अधिकारियों ने बुखार से मौतें होना भी स्वीकारा।
यहां से आए रोगी
डेंगू रोगी बाड़मेर, अन्नपूर्णा रसोई बोरानाडा, सेंट्रल जेल, बावड़ी, सूरसागर, चांदपोल, पाली, ओसियां, नागौर के गोटन, डीएस कॉलोनी, पुलिस लाइन बाड़मेर, शेरगढ़ के तेना व रामेश्वर नगर बासनी से सामने आए हैं।
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