जोधपुर. राजस्थान हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन को हस्तांतरित की जाने वाली भूमि का मुआवजा एक सप्ताह में अदा करने के निर्देश दिए हैं।
इसमें विफल रहने पर अगली सुनवाई पर रक्षा संपदा के प्रधान निदेशक को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहना होगा।
कोर्ट ने सिविल एयरपोर्ट पर न्यू एप्रन और लिंक टैक्सी प्रोजेक्ट में आए गतिरोध को देखते हुए निर्देश दिए कि यदि संवेदक की अंडरटेकिंग के अनुरूप उसे अधूरा कार्य पूरा करने की अनुमति दी जाती है तो यह फरवरी, 2020 से पहले तक पूरा किया जाए।
वरिष्ठ न्यायाधीश संगीत लोढ़ा और न्यायाधीश विनीतकुमार माथुर की खंडपीठ में लिब्रा इंडिया की ओर से दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के अधिवक्ता बीपी बोहरा ने बताया कि एयरफोर्स को हस्तांतरित की जानी वाली निजी भूमि का मुआवजा पूर्व में 1.19 करोड़ रुपए निर्धारित किया गया था, जिसकी स्वीकृति प्राप्त हो चुकी थी।
अब भूमि अवाप्ति अधिकारी ने पुनर्निर्धारित कर मुआवजा राशि 1.62 करोड़ रुपए तय की है। पूर्व में स्वीकृत राशि तीन दिन में और अतिरिक्त राशि एक सप्ताह में जमा करवाना प्रस्तावित है।
कोर्ट ने इस बात को गंभीरता से लिया कि गत 24 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान संपूर्ण राशि दो सप्ताह में जमा करवाने की बात कही गई थी, लेकिन अब तक एक भी पैसा जमा नहीं करवाया गया। अब केंद्र को एक सप्ताह में संपूर्ण मुआवजा जमा करवाने को कहा गया है।
गौरतलब है कि नगर निगम ने एयरफोर्स को 37 एकड़ भूमि नि:शुल्क हस्तांतरित की थी। इसके एवज में एयरफोर्स ने इतनी ही भूमि एयरपोर्ट ऑथोरिटी को सुविधाएं विस्तार के लिए देने की सैद्धांतिक सहमति दी थी। इसमें से काफी बड़ा हिस्सा ऑथोरिटी को हस्तांरित हो चुका है। निगम की ओर से दी गई नि:शुल्क जमीन और एयरफोर्स की मौजूदा भूमि के बीच 2.08 एकड़ निजी भूमि अवाप्त की गई, लेकिन खातेदार को अब तक मुआवजा नहीं दिया गया।
संवेदक ने अंडरटेकिंग दी
संवेदक पीवीआर प्रोजेक्ट्स एंड इंफ्रास्ट्रक्चर्स के डायरेक्टर आनंद गर्ग ने कोर्ट ने अंडरटेकिंंग पेश कर एयरपोर्ट पर सुविधाएं विस्तार के अधूरे कार्य को समय सीमा बताते हुए पूरा करने की बात कही है। सुनवाई के दौरान गर्ग कोर्ट में उपस्थित नहीं थे, जबकि एयरपोर्ट ऑथोरिटी ऑफ इंडिया (एएआइ) के कार्यकारी निदेशक, (इंजीनियरिंग-नॉर्दन रीजन) राकेश कालरा ने अपने पक्ष से अवगत करवाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एएआइ यदि संवेदक की अंडरटेकिंग के अनुसरण में उसे अधूरा कार्य पूरा करने की अनुमति प्रदान करता है तो उसे फरवरी, 2020 तक पूरा किया जाए। कालरा ने कहा कि एएआई बिना किसी पूर्वाग्रह के अनुमति देने के संबंध में एक सप्ताह में निर्णय लेगी। कोर्ट ने 8 नवंबर को सुनवाई मुकर्रर करते हुए कालरा और संवेदक को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं।
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