जोधपुर. भारतीय प्रोद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) जोधपुर ने रेगिस्तान की बालू मिट्टी से गाडिय़ों का कैटालाइटिक कनर्वटर बनाया है। इसकी कीमत केवल 10 हजार रुपए के आसपास है। ऑटोमोबाइल क्षेत्र में बड़ी मानी जा रही इस खोज को आइआइटी द्वारा भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय में पेटेंट कराया गया है और अमरीका के प्रसिद्ध अमरीकन केमिकल सोसायटी जर्नल ने इस रिसर्च को प्रकाशित किया है। वर्तमान में गाडिय़ों का कैटालाइटिक कनवर्टर में दुर्लभ मृदा धातु पैलेडियम/सीरियम से बनता है। भारत को ये दोनों धातुएं चीन से आयात करनी पड़ती है। सोने से भी महंगे पैलेडियम की कीमत 4500 से 5000 रुपए प्रति ग्राम है। यही वजह है कि इनसे बना कनवर्टर 1 से 1.50 लाख रुपए में पड़ता है।
[MORE_ADVERTISE1]क्या है कैटालाइटिक कनवर्टर
वाहनों से निकलने वाले धुएं से वायु प्रदूषण कम करने के लिए इंजन के साथ कैटाइलाटिक कनवर्टर लगाया जाता है जो कार्बन मोनो ऑक्साइड को कार्बन डाई ऑक्साइड, नाइट्रस ऑक्साइड को नाइट्रोजन व ऑक्सीजन और हाइड्रोकार्बन को कार्बन डाई ऑक्साइड व पानी में कनवर्ट करके वायु प्रदूषण को कम करता है। आइआइटी जोधपुर के प्रो. राकेश शर्मा व उनकी छात्रा देविका लेइश्रम ने बालू मिट्टी के साथ आयरन, निकल व कोबाल्ट मिलाकर यह कनवर्टर तैयार किया है। बालू मिट्टी ऑक्सीजन रिजर्वायर के रूप में काम करती है जो वायु प्रदूषकों को अन्य तत्वों में कनवर्ट करती है। यह परपंरागत कनवर्टर से अधिक पर्यावरण फ्रैंडली है।
10 साल बाद भी नहीं निकलेगा धुआं
कार व अन्य चार पहिया वाहन 8-10 साल बाद काला धुआं निकालना शुरू कर देते हैं क्योंकि उनके कैटालाइटिक कनर्वटर की पैलेडियम धातु धीरे-धीरे ऑक्सीकृत होकर क्षीण होने लगती है जबकि बालू मिट्टी के साथ यह समस्या नहीं है। इसके अलावा बालू मिट्टी के कनवर्टर को काम करने के लिए 300 डिग्री से भी कम तापमान चाहिए।
पुराने वाहन भी रहेंगे सुरक्षित, सस्ती होगी गाडिय़ां
बालू से बना कैटालाइटिक कनवर्टर सस्ता होने के साथ पर्यावरण फ्रैण्डली भी है। इससे पुराने वाहनों को जल्द आउटडेटेड नहीं करना पड़ेगा। कारों की कीमत भी कम हो जाएगी।
-प्रो. राकेश शर्मा, रसायन विज्ञान विभाग, आइआइटी जोधपुर
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