जोधपुर. अब वो टाइम गया जब हायर एज्यूकेशन वाले स्टूडेंट्स पेरेंट्स से मिलने वाली पॉकेट मनी पर निर्भर रहते थे। अब स्टूडेंट्स अपनी पॉकेट मनी के साथ ही स्ट्डी का खर्च भी खुद ही निकाल रहे हैं। स्कूल की पढ़ाई हो या कॉलेज, कॉम्पीटिशन एग्जाम की तैयारी। यंगस्टर्स अपनी पॉकेट मनी के लिए अपने टैलेंट का यूज कर मनी अर्न कर रहे हैं। न सिर्फ अच्छी इनकम कर रहे हैं बल्कि अपने काम में क्रिएटिविटी भी दिखा रहे हैं। सनसिटी में भी कई ऐसे यंगस्टर्स हैं जो स्टडी के सिलसिले में यहां आए और खुद को सेल्फ डिपेंड किया। ऐसे स्टूडेंट ऑनलाइन व ऑफलाइन माध्यम से ऑफिस, बिजनेस, हैल्थ, वेल्थ में टैलेंट से मनी अर्न कर रहे हैं।
घरवालों से नहीं मांगने पड़ते पैसे
जैतारण के रहने वाले निर्मल गहलोत ने बताया कि वह कई वर्षों से जोधपुर में रहकर मेडिकल की स्टडी कर रहा है। शुरुआत में पेरेंटस से पॉकेट मनी लेता था, लेकिन एक दिन सोचा कितने दिन पेरेंट्स पर डिपेंड रहूंगा। बस यहीं से खुद को अर्निंग के लिए तैयार किया। रोग जांच केन्द्र में जॉब मिली। अब पढ़ाई के साथ ही जॉब कर रहे हैं। अपनी पॉकेटमनी का खर्चा खुद ही निकाल रहे हैं।
मनी अर्निंग का निकाला तरीका
एम्स के एग्जाम की तैयारी कर रहे सुरेश का होमटाउन जालोर में हैं। पेरेंट्स से मिलने वाली पॉकेट मनी से रहने व खाने पीने का खर्च भी नहीं निकल रहा था। ऐसे में पार्टटाइम जॉब करने का निश्चय किया। कुछ दिनों बाद एक मेडिकल स्टोर पर जॉब मिल गई। वर्तमान में जॉब के साथ ही एग्जाम की तैयारी भी चल रही है।
सोर्स बनाए ढूंढी जॉब
बाड़मेर जिले के रहने वाले प्रकाश ने बताया कि जोधपुर में रहकर ग्रेजुएशन किया। बाद में कॉम्पीटिशन की तैयारी में लग गया। यहां पर खर्चा ज्यादा होने लगा, लेकिन पॉकेट मनी कम थी। एक दिन अन्य दोस्त के कहने पर पार्ट टाइम जॉब ढूंढी। पांच से छह घंटे वर्क कर अपनी स्टडी व खुद की पॉकेट मनी का खर्च खुद ही निकाल रहे हैं।
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