मेहरानगढ़ दुखांतिका : कोर्ट ने कहा, उचित समझे जाने पर मांगी जाएगी आयोग की रिपोर्ट
जोधपुर. राज्य सरकार ने सोमवार को मेहरानगढ़ दुखांतिका (Mehrangarh Dukhantika) की जांच के लिए गठित जस्टिस जसराज चौपड़ा आयोग (Justice Jasraj Chaupra Commission) की रिपोर्ट और दो कैबिनेट सब कमेटी के निष्कर्षों को सीलबंद लिफाफे में राजस्थान हाईकोर्ट (rajasthan highcourt) में पेश कर दिया।
लेकिन कोर्ट ने आयोग की रिपोर्ट फिलहाल यह कहते हुए स्वीकार नहीं की कि कैबिनेट सब कमेटी के निष्कर्षों का अवलोकन करने के बाद उचित समझे जाने पर रिपोर्ट मांगी जाएगी।
मुख्य न्यायाधीश एस रविंद्र भट्ट और न्यायाधीश अशोक कुमार गौड़ की खंडपीठ (Bench of Chief Justice S. Ravindra Bhatt and Judge Ashok Kumar Gaur) में मेहरानगढ़ दुखांतिका संघर्ष समिति (Mehrangarh Dukhantika Sangharsh Samiti) के सचिव मानाराम की ओर से दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता महेन्द्रसिंह सिंघवी ने बताया कि कोर्ट के आदेश की पालना में चौपड़ा आयोग की मूल रिपोर्ट और उसकी फोटो प्रतिलिपि अलग-अलग सीलबंद लिफाफे में पेश की जा रही है।
साथ ही आयोग की रिपोर्ट पर उचित निर्णय लेने के लिए पूर्ववर्ती और वर्तमान सरकार के कार्यकाल में गठित दो कैबिनेट सब कमेटी की रिपोर्ट के कार्यवाही विवरण की प्रतिलिपि भी अलग से बंद लिफाफे में पेश की गई है।
खंडपीठ ने कहा कि रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं करने के संबंध में पहले कैबिनेट सब कमेटी के निष्कर्षों का अवलोकन किया जाना उचित रहेगा। इसके बाद यह देखा जाएगा कि आयोग की रिपोर्ट को देखे जाने की आवश्यकता है या नहीं।
कोर्ट ने आयोग की रिपोर्ट को फिलहाल स्वीकार नहीं करते हुए स्पष्ट किया कि 14 अप्रैल, 2018 तथा 22 जुलाई, 2019 को गठित कैबिनेट सब कमेटी के निष्कर्षों के अवलोकन के बाद उचित समझे जाने पर आयोग की रिपोर्ट की प्रति मांगी जा सकती है।
महाधिवक्ता सिंघवी ने कहा कि कोर्ट जब भी आदेश देगा, सरकार रिपोर्ट की प्रति सीलबंद लिफाफे में पेश कर देगी। कोर्ट ने अगली सुनवाई 3 अक्टूबर को मुकर्रर की है।
दरअसल, पहली कैबिनेट सब कमेटी ने यह पाया था कि रिपोर्ट के भाग-2 में वर्णित कुछ तथ्य अनुमानों और मिथकों पर आधारित हैं। जिन्हें यदि सार्वजनिक डोमेन में रखा जाता है, तो इससे जनता पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब हो सकती है।
मंत्रिमंडल सचिवालय के आदेश से वर्तमान सरकार के कायर्यकाल में गठित दूसरी कैबिनेट सब कमेटी ने भी पूर्व कमेटी की अभिशंषा से सहमति व्यक्त की। इसके बाद कैबिनेट ने भी चौपड़ा आयोग की रिपोर्ट को विधानसभा में नहीं रखने और न ही सार्वजनिक करने का निर्णय किया था।
गौरतलब है कि 30 सितंबर, 2008 को मेहरानगढ़ किले में स्थित चामुंडा माता मंदिर में नवरात्र के पहले दिन भगदड़ मे 216 लोगों की मौत हो गई थी।
तत्कालीन भाजपा सरकार ने अक्टूबर, 2008 में जस्टिस जसराज चौपड़ा की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन किया था। आयोग ने त्रासदी की जांच की और जिम्मेदारी तय की। आयोग ने 5 मई, 2011 को कांग्रेस शासन के दौरान अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी और तब से, रिपोर्ट धूल फांक रही है।
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