नॉन बैंकिंग फाइनेंस कम्पनियां पनपा रही सीजर गिरोह, डरा-धमकाकर ले जा रहे हैं वाहन

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विकास चौधरी/जोधपुर. नॉन बैंकिंग यानि फाइनेंस कम्पनियों से यदि किसी ने फाइनेंस पर वाहन खरीद रखा है और इनकी किस्तें बकाया हो गई हैं तो वसूली के लिए फाइनेंस कंपनी के बदमाश गिरोह यानि सीजर संबंधित थाना पुलिस की मदद से वाहन को जब्त कर कम्पनी के गैराज में ले जाकर खड़ी कर सकते हैं। लेकिन नियम कायदे ताक पर रखकर फाइनेंस कम्पनी के सीजर गिरोहों ने फाइनेंस पर चल रहे वाहन चालकों के लिए खौफ पैदा कर रखा है। यह गिरोह पुलिस के लिए भी चुनौती और आमजन के लिए खतरनाक साबित होने लगे हैं। ट्रक जब्त करने को लेकर उपजे विवाद में डीपीएस चौराहे के पास एक युवक पर गोलियां चलाने की वारदात से साफ है कि यह गिरोह हथियार साथ रखकर खुलेआम आतंक का पर्याय बनते जा रहे हैं।

गुण्डों व बदमाशों का गिरोह होते हैं सीजर


नॉन बैंकिंग कम्पनियां यानि फाइनेंस करने वाली अमूमन हर कम्पनियों ने ऋण वसूली के लिए सीजर नियुक्त कर रखे हैं। बैंकिंग कम्पनियों के पास ऋण वसूली वाले कर्मचारियों की नियुक्ति पुलिस सत्यापन व नियम कायदे के तहत होती है। वहीं, नॉन बैंकिंग कम्पनियों के अधिकांश सीजर बदमाश व अपराधिक प्रवृत्ति वाले होते हैं। जो गिरोह के रूप में घूमते हैं और बकाया किस्त वाले वाहनों को देखकर जबरन जब्त कर ले जाते हैं।

खौफ का पर्याय बन चुके हैं सीजर


चूंकि अधिकांश सीजर अपराधिक प्रवृत्ति वाले होते हैं और वाहनों में घूम-घूमकर बकाया किस्त वाले वाहनों को तलाशते हैं। जिन्हें देखते ही चालक या मालिक को डराने धमकाने लग जाते हैं। इतना ही नहीं, कई सीजर अवैध हथियारों से लैस भी रहते हैं और गोलियां चलाने से भी नहीं चूकते हैं।

सिर्फ पुलिस की मदद से हो सकते हैं जब्त


फाइनेंस कम्पनियां अपनी बकाया किस्तों की वसूली के लिए संबंधित वाहन सीज कर सकती है, लेकिन डरा-धमकाकर या जोर-जबरदस्ती के वाहन नहीं ले जा सकती है। किसी भी वाहन की किस्तें बकाया होने पर कम्पनी के कर्मचारी को वाहन की लोकेशन लेकर संबंधित थाना पुलिस को लिखित में देना होता है। उसके बाद पुलिस को साथ लेकर वाहन सीज किया जा सकता है।

केस : 1

कार के विवाद में फायरिंग का आरोप, समझौता
चार-पांच महीने पहले चौहाबो में एनसीबी ऑफिस के पास कार पर गोलियां चलने की सूचना मिली थी। जांच में कार की किस्तें बकाया होने का मामला सामने आया था। डीपीएस चौराहे पर फायरिंग करने के आरोपी ही इस मामले में भी शामिल थे। हालांकि बाद में दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया था।

केस : 2
ट्रक सीज करने के विवाद में फायरिंग

किस्तें बकाया होने पर सीजर ट्रक को सीज कर ले गए थे। विनती करने के बावजूद उन्होंने ट्रक नहीं छोड़ा। दूसरे दिन वे डीपीएस बाइपास आए तो ट्रक मालिक के रिश्तेदार राजूराम देवासी ने सीजर के वाहन में तोडफ़ोड़ कर डाली थी। इसका बदला लेने के लिए सीजर ने योजनाबद्ध तरीके से गुरुवार को डीपीएस चौराहा स्थित ढाबे पर बैठे राजू देवासी पर फायरिंग कर डाली थी।

कार्रवाई की जाएगी

अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) अनंत कुमार के अनुसार नॉन बैंकिंग फाइनेंस कम्पनी बगैर वैरिफिकेशन के वसूली करने वालों को रख रही है। जो कानूनन गलत है। ऐसी कम्पनियों के नियम कायदे जांच कर ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।



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