जोधपुर. नवरात्रि पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। माता शक्ति की आराधना को समर्पित इस पर्व में मां के नौ रूपों का विशेष पूजन किया जाता है। प्रत्येक दिवस पर माता के एक रूप की प्रधानता से भक्ति की जाती है। माता के पूजन के साथ ही भैरव के पूजन की भी मान्यता है। इस संदर्भ में आज हम पत्रिका के पाठकों व दर्शकों को प्रदेश में पूजे जाने वाले भैरव के विभिन्न रूपों के बारे में अवगत करवा रहे हैं। हर क्षेत्र में विख्यात देवी के मंदिर के साथ ही समीप ही स्थापित भैरव मंदिरों के प्रति श्रद्धालुओं में गहरी आस्था देखने को मिलती रही है। इस अवसर पर हम आपको थार में पूजे जाने वाले भैरव मंदिरों के बारे में बता रहे हैं। थार रेगिस्तान में भैरुजी को एक प्रमुख देवता के रूप में पूजा जाता रहा है।
इनकी मुख्यत: क्षेत्रपाल के रूप में पूज होती रही है लेकिन इनके कई स्वरूपों के भी पूजन का रिवाज देखने को मिलता है। यहां काला भैरु, गोरा भैरु, त्रिकाल भैरव व बटुक भैरव आदि अलग-अलग नामों से इन्हें पुकारा व पूजा जाता है। बाड़मेर के किराड़ू मंदिर समूह में सोमेश्वर मंदिर के दक्षिण दिशा की बाह्य भित्ति पर त्रिपाद भैरव का अंकन देखने को मिलता है। यह भैरव त्रिभंग मुद्रा में स्थानक व स्त्री रूप में प्रदर्शित किया गया है। इसमें भैरव की तीन टांगें तथा चार भुजाएं दिखाई गई हैं। पांवों के पास एक प्रेत लेटा हुआ है। तो आप इस वीडियो में जानिए इन रोचक तथ्यों के बारे में....
डॉ मोहनलाल : एक नजर में
सूचना व जनसंपर्क विभाग के पूर्व उप निदेशक डॉ मोहनलाल गुप्ता, वर्तमान में राष्ट्रीय विधि विवि में जनसंपर्क अधिकारी पद पर कार्यरत हैं। उनकी अब तक विभिन्न विषयों पर 76 किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। गूगल व एमेजॉन आदि प्लेटफॉर्म पर उनकी करीब 126 ई-बुक्स प्रकाशित हुई हैं। महाराणा कुम्भा पुरस्कार से सम्मानित गुप्ता यू-ट्यूब पर अपना चैनल भी चला कर लोगों को इतिहास व समसामयिक मुद्दों पर जानकारी प्रदान कर रहे हैं।
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