रणवीर चौधरी/जोधपुर. एक महिने में 3 छात्रों के खुदकुशी ने शहर के लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर ऐसा क्या कारण है कि युवाओं के खुदकुशी के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं। एक्सपर्ट के अनुसार तीनों मामलों के सुसाइड नोट पढऩे पर पता लगता है, कि छात्रों के परेशानी के बारे में परिजन, दोस्तों व शिक्षकों तक को पता नहीं था। अगर उनसे खुलकर बात की जाती तो वे अपनी परेशानी बताते। इससे उन्हें बचाया जा सकता था। यहीं कारण है कि पिछले साल की तुलना में इस साल दो गुना युवाओं ने खुदकुशी की।
पिछले साल की तुलना में दो गुना हुए खुदकुशी के मामले, 70 प्रतिशत मामलों में युवा
शहर में गत वर्ष जनवरी- जून तक 140 खुदकुशी के मामले हुए थे। जबकि इस वर्ष 312 मामले हुए हैं। इनमें से अधिंकाश युवा हैं, जिनकी उम्र 16 से 28 हैं। वहीं गत वर्ष जनवरी से दिसंबर तक 510 लोगों ने खुदकुशी की थी।
जो हमारा इलाज करने वाले हैं, वहीं सबसे ज्यादा खुदकुशी कर रहे हैं
इस वर्ष जोधपुर एम्स डॉक्टर बनने के लिए देश में दूसरी पंसद रहा। एम्स में पढऩे के बाद जो डॉक्टर हमारी बिमारियों से लेकर मनोरोग तक का इलाज करते हैं। उसी शिक्षण संस्थान में खुदकुशी के मामले सबसे ज्यादा हो रहे हैं। चार साल में खुदकुशी का तीसरा मामला हैं। 26 जून 2018 को अलवर के सिहाली खुर्द निवासी रश्मि यादव, 16 दिसबंर 2017 में थर्ड सेमेस्टर के बाड़मेर के बायतु निवासी पाबूलाल (21) व 7 जुलाई 2015 में जयपुर के फुलेरा निवासी गजेंद्र सिंह (19) ने खुदकुशी की थी।
केस 1:
एम्स की छात्रा रश्मि ने सूसाइड नोट में लिखा कि मुझसे सेल्फ रेस्पेक्ट के बीना नहीं जीया जाता है, 'सर आईएम सॉरी आपने मुझे ज्यादा ही सुना दिया'। रश्मि को शिक्षक के किसी बात पर डांटने के बाद उसने अपनी परेशानी परिजनों, टीचर, दोस्तों से भी नहीं कि अगर वह इस बारे में किसी से बात करती तो उसकी परेशानी दूर होने के साथ वह इतना बड़ा कदम नहीं उठाती। मानवाधिकार आयोग न हाल ही में छात्रावास में खुदकुशी के बाद मनोवेज्ञानिक की क्लास शुरू करवा दी लेकिन एम्स जैसे संस्थान में इसे अभी शुरू नहीं किया गया है।
केस 2:
'पापा मेरे बाद दूसरी शादी मत करना, मां के बिना रहना मुश्किल है। में आपकी दूसरी शादी बात नहीं सुन सकता'। गत 26 जून को छात्रावास में खुदकुशी करने से पहले 12वीं के छात्र हरदयाल ने सूसाइड नोट में यह बात कहीं थी। पिता के दूसरी शादी की बात सुनकर हरदयाल खुदकुशी कर लेगा, यह परिवार में किसी ने सोचा तक नहीं होगा। छात्र के पिता ने दूसरी शादी नहीं की थी, जबकि छात्र को यकीन हो गया था कि उसके पिता ने दूसरी शादी कर ली। महज संदेह खुदकुशी का कारण बना ऐसे में परिजनों के खुलकर बात करना ही उसका संदेह दूर कर सकता था। दिसंबर में मां की मौत के बाद हरदयाल को भावनात्मक सहारे की जरूरत थी।
केस 3:
शास्त्रीनगर में रहने वाले ललित बहादुर बोहरा की बड़ी बेटी चंद्रकला (14) का नेपाल की नागरिक्ता के कारण स्कूल में एडमिशन नहीं हो पाया था। इस पर बात से परेशान होकर उसने गत 25 जून को खुदकुशी कर ली थी। महज एडमिशन नहीं होने पर चंद्रकला खुदकुशी कर लेगी, परिवार वालों को यकिन नहीं हुआ। बच्चों से खुलकर बात करने पर ही उनकी परेशानियों के बारे में पता लगता हैं, महज छोटी दिखते वाली बातें उनके खुदकुशी का कारण बन जाती हैं।
इन बातों का रखे ध्यान ताकी घर का चिराग न बुझे
-बच्चे अपना अधिकतर समय पढ़ाई, टीवी, मोबाइल पर समय बिताते हैं। इस कारण उनके दोस्त भी कम होते हैं, जिन्हें वह अपनी हर बात बता सके। ऐसे में माता-पिता उनके दोस्त बनकर रहे, ताकि वे अपनी हर समस्यां उन्हें बता सकें।
-परिजन बच्चों से खुलकर बात करें, तभी उन्हें छोटी दिखने वाली समस्यां, उनके बच्चों के लिए कितनी बड़ी समस्यां है।
-छात्रों को अधिकतर समय स्कूल व कॉलेज में गुजरता हैं। शिक्षकों के पढ़ाई का दबाव या डांटने पर छात्र कई बार डिप्रेशन में चले जाते हैं। ऐसे में स्कूल में मनोवैज्ञानिक क्लास की सख्त जरूरत होती है। वहीं हॉस्टल वाले छात्रों का खास ध्यान रखना होता हैं, क्योंकि वे फोन पर परिजनों को अपनी समस्यां नहीं बता पाते हैं।
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/2MsYXWg
0 comments:
Post a Comment