जोधपुर के उद्योगों पर लटकी तलवार! धरती को बंजर करते प्रदूषित पानी रोकने में नाकाम जेपीएनटी

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- जोधपुर के सभी उद्योगों को बंद करने की अनुशंसा का फैसला 29 तक टला
- एनजीटी के नियुक्त कोर्ट कमिश्नर ने की थी अनुशंसा

जोधपुर. शहर के उद्योगों को बंद करने की सिफारिश का फैसला 29 मई तक टल गया है। एनजीटी में गुरुवार को हुई इस मामले में सुनवाई के दौरान रिपोर्ट पेश की गई। इस पर गुरुवार को फैसला आना था, लेकिन अब 29 मई तक टल गया है।
शहर की औद्योगिक इकाइयों के प्रदूषित पानी के उपचार व निस्तारण को लेकर कार्य कर रही संस्था जोधपुर प्रदूषण निवारण ट्रस्ट पूरी तरह से फेल साबित हुई है। जेपीएनटी का अपनी सदस्य इकाइयों पर नियंत्रण नहीं है। यह खुलासा एनजीटी की ओर से नियुक्त कोर्ट कमिश्नर बिट्स पिलानी के सिविल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर और डीन डॉ. अजीत प्रताप सिंह ने अपनी रिपोर्ट में किया है। जोजरी नदी में हो रहे प्रदूषण को लेकर ग्राम पंचायत अराबा के लोगों और यूआर बेनीवाल की ओर से दर्ज शिकायत पर एनजीटी ने सिंह को कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किया था। उन्होंने अपनी रिपोर्ट पेश कर जेपीएनटी सहित अन्य सरकारी एजेंसियों को प्रदूषण रोकने में नाकारा बताया। रिपोर्ट में बताया गया कि औद्योगिक इकाइयों से पाइपलाइन के जरिए जेपीएनटी के सीईटीपी तक पहुंचने वाला प्रदूषित पानी पूरी तरह से उपचारित ही नहीं हो रहा और ना ही मापदंडों के अनुसार वहां पहुंचने वाले प्रदूषित पानी को उपचारित किया जा रहा है। पानी सीईटीपी से रीको के नालों से बहकर सीधा जोजरी नदी में जा रहा है, जो अंतत: नदी को प्रदूषित कर रहा है।

 

सुरक्षा मानक ही नहीं

स्टील इकाइयों के निरीक्षण में भी खेद जताते करते हुए रिपोर्ट में बताया गया कि इकाइयों के संचालन में नियमों का पालन नहीं किया जा रहा। इकाइयों में प्रदूषित पानी को नापने के फ्लोमीटर नहीं पाए गए। श्रमिकों के मास्क, ग्लब्ज आदि सेफ्टी को लेकर किसी प्रकार की व्यवस्था नहीं दिखी।

 

सरकारी विभाग भी नाकाम

जेपीएनटी के साथ राजस्थान राज्य प्रदूषण निवारण मंडल जोधपुर, नगर निगम, जोधपुर विकास प्राधिकरण, रीको आदि एजेंसियों को भी रिपोर्ट में प्रदूषण रोकने में नाकाम बताया और प्रदूषण रोकने के लिए इन एजेंसियों की ओर से गंभीर प्रयास नहीं करने का हवाला दिया गया।

 

यहां किया निरीक्षण

कोर्ट कमिश्नर ने एनजीटी के आदेश की अनुपालना में दो चरणों में जोधपुर के 4 सीईटीपी, बालोतरा, बिठूजा और जसोल के सीईटीपी, टैक्सटाइल इकाइयों और जोजरी नदी व आस-पास के गांव में विजिट की। रिपोर्ट में बताया गया कि अवैध इकाइयों का भी धड़ल्ले से संचालन हो रहा है जिस पर कोई नियंत्रण नहीं है।

419 इकाइयां जुड़ी है
419 इकाइयां जेपीएनटी से जुड़ी हुई हैं, जिनमें टेक्सटाइल की 312, स्टील रेलिंग की 94 तथा अन्य 13 हैं। 41835.9 टन स्लज छोड़ा गया रिपोर्ट में बताया गया कि जेपीएनटी से औद्योगिक इकाइयों का अपशिष्ट छोड़ा गया, जो प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से जोजरी नदी के आस-पास की जमीन में मिल गया।

 

स्लज का गणित

वर्ष ----- स्लज मीट्रिक टन में

2014-15------9890.8

2015-16------9535.6
2016-17------12176.2

2017-18------10233.3
कुल- ------ 41835.9

 



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