कश्मीर के वर्तमान हालात पर एक कविता । आज देश के वीर जवानों को सलाम करने का दिन है । तो आओ सब मिल कर नमन करे उन जवानों को जो हमारी रक्षा के लिए दिन रात जाग कर उनका मुकाबला कर रहे है ।
सुलग रहा कश्मीर, धधकती जन्नत में चिंगारी है |
शेरों को श्वान ललकार रहे, गद्दार वतन पर भारी है ||
गिरि की धवल चोटियों पर,छायी रक्तिम परछाई है|
हिमखंडों उगलते अंगारे,कालिमा उभर कर आयी है||
बारूदों की फसल उग रही, जन्नत वाली घाटी में |
केशर- क्यारी मुरझाई है, जहर घुला है माटी में ||
झेलम की लहरों में भी चीत्कार सुनाई देती है |
चौराहों-बाजारों में फुफकार सुनाई देती है ||
जगह-जगह विषधर भुजंग, फन को फैलाये बैठें हैं |
फूलों की सुन्दर घाटी में आग लगाये बैठे हैं ||
भारत के टुकडो पर पलकर, भारत से गुर्राते हैं |
पाकिस्तानी झंडे, जिनके हाथों में लहराते है ||
जिस कश्मीर की रक्षा में, वीरों के बलिदान हुए |
जहाँ तिरंगे के खातिर, अगणित सपूत कुर्बान हुए ||
वहीं तिरंगा सड़कों पर, पैरों से रौंदा जाता है |
उसका कितना अपमान सहें, जो भारत-भाग्य-विधाता है||
सैनिक हैं सम्मान वतन के, मान है उनकी वर्दी का|
बंदूकों में प्रत्योत्तर है, आतंकी दहशतगर्दी का ||
फिर भी उनकी गोली खाते, भारत के जाबांज यहाँ |
सैनिक को घायल कर देते, जाहिल पत्थरबाज यहाँ ||
जब हम भारत की धरती पर, ‘भारत-मुर्दाबाद’ सुनेगें |
तो शैतानो की औलादें, फिर कहाँ शांति-संवाद सुनेगें ||
लगता है अर्जुन को फिर से, गांडीव उठाना ही होगा |
पाञ्चजन्य का शंखनाद, उन्हें सुनाना ही होगा ||
जो भारत मुर्दाबाद कहा, तो वह कैसे जिन्दा होगा|
अब चूक गया है धैर्य, तिरंगा और न शर्मिंदा होगा ||
‘अफजल’ बन कर आयेंगे तो सबक सिखाना ही होगा |
‘बुरहान’ पैदा करने वाला, भ्रूण मिटाना ही होगा ||
सुलग रहा कश्मीर, धधकती जन्नत में चिंगारी है |
शेरों को श्वान ललकार रहे, गद्दार वतन पर भारी है ||
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