नागौर. राजस्थान के कुख्यात गैंगस्टर आनंदपाल को ढूंढने का जिम्मा एसओजी(स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) के पास है। एसओजी 6 माह में परबतसर कोर्ट में यह नहीं बता पाई है कि आनंदपाल कहां हैं? और उसे कब तक पकड़ लेंगे। यहां तक की एसओजी के जांच अधिकारी वारंट की तारीखें भी दो बार बढ़ा चुके हैं।क्यों हर मोड़ पर पीछे है पुलिस...
- 21 मार्च को आनंदपाल गैंग की फॉरच्यूनर अजमेर से मिठाई लेकर नागौर जिले की सीमा में घुसी थी।
- एसओजी और अजमेर, जयपुर ग्रामीण पुलिस के पास इसकी कोई सूचना नहीं थी।
- इस वजह से नागौर पुलिस को भी मुठभेड़ के 6 घंटे बाद तक यह पता नहीं चल सका, जिन्हें वे ढूंढ रहे हैं वे राजू ठेहट गैंग के हैं या फिर आनंदपाल गैंग के बदमाश।
- दैनिक भास्कर की पड़ताल में छह माह पहले आनंदपाल के भागने से अब तक और 21 मार्च को हुई मुठभेड़ के आठ दिन बाद कई चौंकाने वाले तथ्य सामने अाए हैं।
- सबसे बड़ी बात यह सामने आई है कि आनंदपाल को ढूंढने का सारा जिम्मा एसओजी ने अपने पास ले रखा है।
- गैंगस्टर को ढूंढ़ने के लिए मोबाइल ट्रेसिंग, कॉल डाटा एनालिसिस व राजू ठेहट तथा एपी गैंग के गुर्गों की जानकारियां रखने का काम एसओजी की कंट्रोलिंग में है।
- यह सारा काम जयपुर से ही हो रहा है। गैंग की सक्रियता और अपराधियों की लोकेशन के बाद एसओजी ही जिलों की पुलिस को गाइड करती है और कार्रवाई के निर्देश देती है।
- 10 जिलों में अलर्ट के बाद भी एटीएस, एसओजी, इंटेलिजेंस व सीआईडी फेल।
- 18 मार्च को कोर्ट में एसओजी ने कहा था- आनंदपाल ढूंढने को और वक्त दो।
गलतियों के 7 बड़े कारण
मोबाइल नं. पता नहीं एसओजी को- क्यों आनंदपाल दिन में तीन से चार सिम बदलता है। उसके नाम से कोई सिम नहीं है। मैसेज भी ब्लैक बेरी से करता है, जो ट्रेस नहीं होते। सोशल मीडिया पर अलग आईडी का इस्तेमाल करता है।
हथियार चलाने की अनुमति चाहिए - क्यों आनंदपाल जब भागा तब गोलियां नहीं चलीं। इस बार भी कमांडो शहीद। आरोप यह है कि पहले से ही किसी पुलिसकर्मी को आनंदपाल काे देखते ही गोली मारने जैसे आदेश नहीं है।
कागजी कार्रवाई में उलझा सिस्टम - क्यों आनंदपाल की सूचनाओं के आदान-प्रदान में कई सप्ताह लगते हैं। डीजी तक स्वीकृतियां लेने में लगे रहते हैं। साक्ष्य के बाद भी गैंग कौन सी अफसर नहीं बता पाए।
उच्चाधिकारियों में तालमेल की कमी व अंदरूनी कलह- क्यों एसओजी पुलिस में श्रेय लेने की होड़। अजमेर के सुरसुरा से गाड़ी निकलती है, लेकिन नागौर पुलिस को खबर तक नहीं। एसआेजी अफसर समय पर नहीं दे रहे सूचना।
मॉनिटरिंग की पुलिस में कमी- क्यों सीकर, नागौर, चूरू पुलिस ने फोकस किया। नोखा, जैसलमेर, भीलवाड़ा, जोधपुर में सूचना नहीं। एसओजी जयपुर से साइबर ट्रैक चला रही मगर सूचना पहुंचने में देरी।
आदान-प्रदान में लीकेज का खतरा - क्यों डीजी मुख्यालय से लेकर एसओजी मुख्यालय तक सूचनाएं आते आते दो दर्जन से अधिक चैनल। विजेंद्र चारण के पकड़ने जाने पर भी लगे थे सूचनाएं लीक होने के आरोप।
मुखबिरी तंत्र भी कमजोर- क्यों गैंगस्टरों के मोबाइल नंबर मिलते हैं तो ट्रेस सिस्टम ऑन होता है। तब तक वे नंबर बदल लेते हैं। पारंपरिक मुखबिरों की संख्या अब 50 प्रतिशत से भी कम रह गई है।
लोकेशन ही ट्रेस नहीं हुई
1- एसओजी ने प्रदेश के समस्त जिलों के सभी थानों में यह सूचना भिजवाई है कि आनंदपाल या उसके साथ कहीं भी दिखे तो उन्हें तत्काल गिरफ्तार किया जाए, लेकिन एसओजी अभी तक गैंगस्टर की सही लोकेशन ट्रेस नहीं कर पाई है। आखिर यहां कैसेै कमी रह गई।
2- आनंदपाल के मुख्य ठिकानों में भीलवाड़ा, नागौर, जयपुर ग्रामीण, अजमेर, सीकर, चूरू, बीकानेर, जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर हैं। फॉरच्यूनर कार में मिले मोबाइल नं. की लोकेशन सुरसुरा, किशनगढ़, भीलवाड़ा, जयपुर ग्रामीण, अजमेर जिले के बाद नागौर आई है। एसओजी के पास यह नंबर तो अब तक थे ही नहीं जो फॉरच्यूनर में मिले हैं।
आगे की स्लाइड्स में पढ़िए कहां बंद हैं आनंदपाल के साथी...
FacebookWhatsapp
2 of 5
10 जिलों में अलर्ट के बाद भी एटीएस, एसओजी, इंटेलिजेंस व सीआईडी फेल।
अजमेर में बंद आनंदपाल के साथी
3- अजमेर जेल में आनंदपाल के 15 साथी बंद हैं। जयपुर जेल में राजू ठेहट व उसकी गैंग के लोग हैं। शंकर की गिरफ्तारी से एक बार फिर खुलासा हुआ कि दोनों गैंग के मुखिया में तालमेल है।
4- आनंदपाल गैंग के पास फिरौती का पैसा कहां से आ रहा है, वे व्यापारी कौन हैं जो पैसा दे रहे हैं। फॉरच्यूनर कार से भी पौने पांच लाख कैश मिला था। पुलिस गैंगस्टर के पास पहुंच रहे पैसे को रोक नहीं पा रही।
आगे की स्लाइड्स में पढ़िए जहां से गैंगस्टर की फरारी बनी, फिर वहीं पूरी गैंग।
FacebookWhatsapp
2 of 5
8 मार्च को कोर्ट में एसओजी ने कहा था- आनंदपाल ढूंढने को और वक्त दो।
जहां से गैंगस्टर की फरारी बनी, फिर वहीं पूरी गैंग
आनंदपाल ने अजमेर की हाई सिक्यूरिटी जेल से ही भागने की पूरी साजिश रची। यह खुलासा अब तक हो चुका है। इसके बावजूद उसे भगाने में सहयोग करने वाले 7 आरोपियों को वापस इसी जेल में रखा जा रहा है। एपी गैंग के लिए अजमेर की हाई सिक्यूरिटी जेल घर जैसी है। इसके प्रमाण उसकी फरारी के बाद से ही मिले थे।
जबकि, उप्रेती की रिपोर्ट में भी अजमेर कमजोर : आनंदपाल फरारी मामले की जांच कर रहे आईएएस दीपक उप्रेती की रिपोर्ट अभी तक सरकार को नहीं मिली है, मगर उच्च सूत्रों ने बताया कि उप्रेती की रिपोर्ट में भी अजमेर की सुरक्षा व खुफिया व्यवस्था को कमजोर माना गया है।
आगे की स्लाइड्स में पढ़िए एएसपी व जांच अधिकारी पवन मीणा से बातचीत
FacebookWhatsapp
2 of 5
गैंगस्टर को ढूंढ़ने के लिए मोबाइल ट्रेसिंग, कॉल डाटा एनालिसिस व राजू ठेहट तथा एपी गैंग के गुर्गों की जानकारियां रखने का काम एसओजी की कंट्रोलिंग में है।
आनंदपाल को ढूंढ़ने का मौका मांगा है : एसओजी के एएसपी व जांच अधिकारी पवन मीणा से बातचीत
भास्कर : आनंदपाल फरारी की जांच कौन कर रहा है?
मीणा : एसओजी, एटीएस व पुलिस मिलकर, आईओ मैं ही हूं।
मीणा : एसओजी, एटीएस व पुलिस मिलकर, आईओ मैं ही हूं।
भास्कर : क्या वारंट की तारीख बढ़वाई है?
मीणा : हां, परबतसर कोर्ट में 13 अप्रैल तक।
मीणा : हां, परबतसर कोर्ट में 13 अप्रैल तक।
भास्कर : एसओजी मामले में अब तक कहां पहुंची है?
मीणा : जांच जारी है, आनंदपाल का सुराग नहीं मिला है। जांच में जुटे हैं।
मीणा : जांच जारी है, आनंदपाल का सुराग नहीं मिला है। जांच में जुटे हैं।
3- अजमेर जेल में आनंदपाल के 15 साथी बंद हैं। जयपुर जेल में राजू ठेहट व उसकी गैंग के लोग हैं। शंकर की गिरफ्तारी से एक बार फिर खुलासा हुआ कि दोनों गैंग के मुखिया में तालमेल है।
4- आनंदपाल गैंग के पास फिरौती का पैसा कहां से आ रहा है, वे व्यापारी कौन हैं जो पैसा दे रहे हैं। फॉरच्यूनर कार से भी पौने पांच लाख कैश मिला था। पुलिस गैंगस्टर के पास पहुंच रहे पैसे को रोक नहीं पा रही।
जहां से गैंगस्टर की फरारी बनी, फिर वहीं पूरी गैंग
आनंदपाल ने अजमेर की हाई सिक्यूरिटी जेल से ही भागने की पूरी साजिश रची। यह खुलासा अब तक हो चुका है। इसके बावजूद उसे भगाने में सहयोग करने वाले 7 आरोपियों को वापस इसी जेल में रखा जा रहा है। एपी गैंग के लिए अजमेर की हाई सिक्यूरिटी जेल घर जैसी है। इसके प्रमाण उसकी फरारी के बाद से ही मिले थे।
जबकि, उप्रेती की रिपोर्ट में भी अजमेर कमजोर : आनंदपाल फरारी मामले की जांच कर रहे आईएएस दीपक उप्रेती की रिपोर्ट अभी तक सरकार को नहीं मिली है, मगर उच्च सूत्रों ने बताया कि उप्रेती की रिपोर्ट में भी अजमेर की सुरक्षा व खुफिया व्यवस्था को कमजोर माना गया है।
आगे की स्लाइड्स में पढ़िए एएसपी व जांच अधिकारी पवन मीणा से बातचीत
FacebookWhatsapp
4 of 5
गैंगस्टर को ढूंढ़ने के लिए मोबाइल ट्रेसिंग, कॉल डाटा एनालिसिस व राजू ठेहट तथा एपी गैंग के गुर्गों की जानकारियां रखने का काम एसओजी की कंट्रोलिंग में है।
आनंदपाल को ढूंढ़ने का मौका मांगा है : एसओजी के एएसपी व जांच अधिकारी पवन मीणा से बातचीत
भास्कर : आनंदपाल फरारी की जांच कौन कर रहा है?
मीणा : एसओजी, एटीएस व पुलिस मिलकर, आईओ मैं ही हूं।
मीणा : एसओजी, एटीएस व पुलिस मिलकर, आईओ मैं ही हूं।
भास्कर : क्या वारंट की तारीख बढ़वाई है?
मीणा : हां, परबतसर कोर्ट में 13 अप्रैल तक।
मीणा : हां, परबतसर कोर्ट में 13 अप्रैल तक।
भास्कर : एसओजी मामले में अब तक कहां पहुंची है?
मीणा : जांच जारी है, आनंदपाल का सुराग नहीं मिला है। जांच में जुटे हैं।
मीणा : जांच जारी है, आनंदपाल का सुराग नहीं मिला है। जांच में जुटे हैं।
0 comments:
Post a Comment