भारत-नेपाल सीमा-एक रोमांचक सफर
जनकपुर धाम नेपाल का एक सूबा जिसे माता सीता की जन्मस्थली माना जाता हैं जो भारत नेपाल की सीमा पर स्थित हैं।।अगर आपको मजबूरियों में लिपटे इंसान देखने हो,गरीबी का विकराल रूप किस तरह वहां के बाशिंदों को काल का ग्रास बनाता हैं तो जाइए भारत के बिहार राज्य के जयपुरा जिले और नेपाल के जनकपुर जिले की ओर जहाँ गरीबी का आलम इस कदर हावी हैं कि इस आधुनिक युग में भी वे लोग बहुत पिछड़े लगते हैं।।नेपाल रेलवे क़ी ओर से एक जर्जर अवस्था में रेलगाड़ी चलायी जाती हैं जो भारत नेपाल को जोड़ती हैं।वो रेल ही वहां की जनता की जीवन रेखा हैं।।एक समय भारत ने उपहार स्वरूप ऐसी ही चार रेलगाडियां उपहार में दी थी नेपाल को जिसे युग बीते अगर कुछ नहीं बदला तो वो रेलगाड़ी।
अपना सफर बिहार से शुरू होता हैं बीस किलोमीटर की दुरी हैं भारत से जनकपुर की हरी भरी लहलहाती फसलों के बीच से अजगर सी सरकती रेल चरमराती पटरियों पर बुढ़िया सी लंगड़ाती लुढ़कती सी प्रतीत होती हैं जो हर गाँव हर मोहल्ले पर रूकती जाती हैं।।खचाखच भरी ज्यादातर नेपाली सवारियां जो भारत से रोजमर्रा की चीजें और कीमती सामान बिना कर चुकाए नेपाल ले जाकर महंगे भाव पर बेच अपना पेट पालते हैं।।नेपाल रेलवे के कर्मचारी मोहताज हैं इस रेलगाड़ी के अगर सुचारू रूप से चले तो उनके घरों का चूल्हा जलता हैं संविदा पर रखा हैं सरकार ने बहुत ही कम पगार पर इन कर्मचारियों को लेकिन इनका कार्य के प्रति समर्पण देख मन खुश हो जाता हैं।।दुनिया में मानव सबसे बुद्धिमान सामाजिक प्राणी माना गया हैं, लेकिन कई बार परिस्थतियाँ हालात के आगे घुटने टेक देने को विवश कर देती हैं।।नेपाल का यह जिला अपनी गरीबी और बेरोजगारी के लिए बदनाम हैं।पिछड़ा सा बदहाल जिला जहाँ बहुत संख्या में भक्तगण दूर दूर से माता सीता की जन्मस्थली के दर्शनार्थ आते रहते हैं।।वहां के युवा अधिकतर विदेशों क़ी ओर रोजगार हेतु बड़ी संख्या में पलायन कर रहे हैं और इससे पहले दलालों को चुकानी पड़ती हैं भारी कीमत जो ब्याज पर ली जाती हैं ।।अब वहाँ के गाँवों में युवा ढूंढने पर भी नहीं मिला करते हैं।भारत में सबसे ज्यादा रोजगार की तलाश में नेपाली युवा आते हैं और यहां से गांव के गांव पलायन कर रहे हैं।।भारत के बिहार का जयपुरा जिला भी कमोबेश इसी प्रकार के हालातों से जूझता प्रतीत होता हैं।पिछड़ापन अशिक्षा,भुखमरी,बेरोजगारी,गुंडाराज आदि आज भी भारत के इस राज्य में व्यापक स्तर पर व्याप्त हैं जो यहाँ की सरकारें सदा से उन्हें मिटाने का संकल्प लेती हुई भोलीभाली जनता से वोट हथियाती आई हैं।। इस जिले को बिहार का आइना कहें तो अतिशयोक्ति नहीं होगी जिस प्रकार से गरीबी और बेरोजगारी यहाँ हैं ऐसी कहीं देखने को नहीं मिलती।।आजादी के 70 साल बाद भी हालत जस की तस बनी हुई हैं जबकि सरकारें गरीबी उन्मूलन के सैंकड़ो कार्यक्रम चलाती आई हैं जिसका परिणाम शून्य हैं अब जरूरत हैं तो ऐसे कार्यक्रमों को धरातल पर ला सचमुच गरीबी मिटाने की हैं।।इंसानों को इस तरह पल पल मूलभूत सुविधाओं से वंचित देख मन दुखी होता हैं मानव ह्रदय करुणा से भर उठता हैं।इन सबके बीच वहां की जनता की अदम्य इच्छाशक्ति और अपने क्षेत्र से विशेष प्रेम देखते ही बनता हैं।।वो लोग संघर्ष की मिसाल हैं जो ऐसे विषम हालातों का सामना करते हुए खुद का अस्तित्व बचाये हुए हैं।।आज सवाल ये हैं कि जब भारत को विश्व शक्ति के रूप में पुनः स्थापित होना हैं तो धरातल पर सबको मिलकर काम करना होगा और इन गरीब असहाय लोगों के जीवन स्तर को ऊँचा उठाते हुए रोजगार के साधन उपलब्ध करवाने होंगे।।
जय हिन्द जय भारत।।
अपना सफर बिहार से शुरू होता हैं बीस किलोमीटर की दुरी हैं भारत से जनकपुर की हरी भरी लहलहाती फसलों के बीच से अजगर सी सरकती रेल चरमराती पटरियों पर बुढ़िया सी लंगड़ाती लुढ़कती सी प्रतीत होती हैं जो हर गाँव हर मोहल्ले पर रूकती जाती हैं।।खचाखच भरी ज्यादातर नेपाली सवारियां जो भारत से रोजमर्रा की चीजें और कीमती सामान बिना कर चुकाए नेपाल ले जाकर महंगे भाव पर बेच अपना पेट पालते हैं।।नेपाल रेलवे के कर्मचारी मोहताज हैं इस रेलगाड़ी के अगर सुचारू रूप से चले तो उनके घरों का चूल्हा जलता हैं संविदा पर रखा हैं सरकार ने बहुत ही कम पगार पर इन कर्मचारियों को लेकिन इनका कार्य के प्रति समर्पण देख मन खुश हो जाता हैं।।दुनिया में मानव सबसे बुद्धिमान सामाजिक प्राणी माना गया हैं, लेकिन कई बार परिस्थतियाँ हालात के आगे घुटने टेक देने को विवश कर देती हैं।।नेपाल का यह जिला अपनी गरीबी और बेरोजगारी के लिए बदनाम हैं।पिछड़ा सा बदहाल जिला जहाँ बहुत संख्या में भक्तगण दूर दूर से माता सीता की जन्मस्थली के दर्शनार्थ आते रहते हैं।।वहां के युवा अधिकतर विदेशों क़ी ओर रोजगार हेतु बड़ी संख्या में पलायन कर रहे हैं और इससे पहले दलालों को चुकानी पड़ती हैं भारी कीमत जो ब्याज पर ली जाती हैं ।।अब वहाँ के गाँवों में युवा ढूंढने पर भी नहीं मिला करते हैं।भारत में सबसे ज्यादा रोजगार की तलाश में नेपाली युवा आते हैं और यहां से गांव के गांव पलायन कर रहे हैं।।भारत के बिहार का जयपुरा जिला भी कमोबेश इसी प्रकार के हालातों से जूझता प्रतीत होता हैं।पिछड़ापन अशिक्षा,भुखमरी,बेरोजगारी,गुंडाराज आदि आज भी भारत के इस राज्य में व्यापक स्तर पर व्याप्त हैं जो यहाँ की सरकारें सदा से उन्हें मिटाने का संकल्प लेती हुई भोलीभाली जनता से वोट हथियाती आई हैं।। इस जिले को बिहार का आइना कहें तो अतिशयोक्ति नहीं होगी जिस प्रकार से गरीबी और बेरोजगारी यहाँ हैं ऐसी कहीं देखने को नहीं मिलती।।आजादी के 70 साल बाद भी हालत जस की तस बनी हुई हैं जबकि सरकारें गरीबी उन्मूलन के सैंकड़ो कार्यक्रम चलाती आई हैं जिसका परिणाम शून्य हैं अब जरूरत हैं तो ऐसे कार्यक्रमों को धरातल पर ला सचमुच गरीबी मिटाने की हैं।।इंसानों को इस तरह पल पल मूलभूत सुविधाओं से वंचित देख मन दुखी होता हैं मानव ह्रदय करुणा से भर उठता हैं।इन सबके बीच वहां की जनता की अदम्य इच्छाशक्ति और अपने क्षेत्र से विशेष प्रेम देखते ही बनता हैं।।वो लोग संघर्ष की मिसाल हैं जो ऐसे विषम हालातों का सामना करते हुए खुद का अस्तित्व बचाये हुए हैं।।आज सवाल ये हैं कि जब भारत को विश्व शक्ति के रूप में पुनः स्थापित होना हैं तो धरातल पर सबको मिलकर काम करना होगा और इन गरीब असहाय लोगों के जीवन स्तर को ऊँचा उठाते हुए रोजगार के साधन उपलब्ध करवाने होंगे।।
जय हिन्द जय भारत।।
स्रोत-डिस्कवरी कार्यक्रम नेपाल रेलवे से संकलित
लेखक-राज कुमार सिंह"आजाद"
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