गुदड़ी के लाल को मिला पद्मश्री ।

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जोधपुर । ओडिशा के बारगढ़ जिले में हलधर का जन्म एक गरीब परिवार में हुआ। बड़ी मुश्किल से तीसरी क्लास तक पढ़ाई की।10 साल की उम्र में पिता का निधन हो गया। अपना और परिवार का पेट पालने के लिए मिठाई की दुकान पर 2 साल तक बर्तन धोने का काम करना पड़ा। ये वहीं दौर था जब हलधर की रूचि कविता और राइटिंग की ओर हुआ। पहली कविता 'धोनो बारगछ' (ओल्ड बनयान ट्री) 1990 में लोकल मैगजीन में छपी थी।
जीवन की तमाम कठिनाइयों को हराकर आज कवि हलधर नाग समाज के लिए प्रेरणा बन चुके है। एक यूनिवर्सिटी के 5 रिसर्च स्कॉलर उनके काम और जीवन पर PhD कर रहे हैं
dangiyawasnews.blogspot.com की तरफ से हलधर नाग को जन्मदिन की हार्दिक बधाई। — 
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