चार स्टेप में जानिए अपहरण के चार दिन की पूरी कहानी, कार चुराई और खरीदी थी फर्जी सिम
जोधपुर. मंदी में कुछ प्लाट क्या बेच दिए, सियाराम का बेटा भूपेंद्र अपहर्ताओं की नजर में चढ़ गया। अपहर्ताओं की यह गैंग अपने-अपने धंधों में फेल हो चुकी थी। पैसे जुटाने के लिए तीन-चार माह से किसी वारदात को अंजाम देने की प्लानिंग कर रहे थे। एक महीने पहले उन्होंने 50 लाख रुपए के लिए भूपेंद्र के अपहरण के प्लान को फाइनल किया। शातिर दिमाग से पारिवारिक रिश्तों का उपयोग किया, तकनीक से बचने का खेल खेला और पुलिस को भ्रमित करने की चालें चलते रहे।
अब पूरे मामले का खुलासा हो गया है। अपहरण का केस हल करने के लिए डीसीपी (पूर्व) विनीत कुमार, एडीसीपी (पूर्व) श्रीमन लाल मीणा, एसीपी जसवंत सिंह, पुलिस निरीक्षक हनुमान सिंह, मदन बेनिवाल, प्रदीप डांगा, भवानीसिंह, रामसिंह, एसआई कमलदान चारण, हेडकांस्टेबल प्रकाश राम, कांस्टेबल बिंजाराम, इमरान खां, महिपाल, मुकेश, जमशेद की टीम बनाई थी।
1. योजना- परिचितों ने घर के सामने रेस्टोरेंट पर की
सियाराम का पड़ोसी और परिचित लोकेश सारण इस वारदात का मास्टर माइंड था। सियाराम के छोटे भाई का जब पत्नी से विवाद चल रहा था, तब वह भी उनके साथ थाने व कोर्ट के चक्कर लगाता था। उसका काम छूट चुका था। घर के सामने होटल चलाने वाले रिड़मल का धंधा बंद हो चुका था तो कुक जितेंद्र भी बेरोजगार हो गया। तीनों का दोस्त नटवरसिंह आपराधिक प्रवृत्ति का था। तीन-चार महीनों से वारदात की प्लानिंग करते एक महीने पहले उन्हें सियाराम के बच्चे भूपेंद्र को टारगेट किया और 50 लाख रुपए की फिरौती मांगनी तय की।
2. वारदात- पहला फेल, दूसरे प्रयास में टारगेट हिट
वारदात को अंजाम देने के लिए नटवरसिंह चोरी की कार ले आया, अपहरण के दिन कार वही चला रहा था। रिड़मल ने अपने गांव में बने एक घर में बच्चे को रखने का इंतजाम किया। जितेंद्र के पास बावड़ी की महिला की आईडी थी, उसने सिम का इंतजाम करने के अलावा एक अन्य साथी ने नटवर के साथ मिलकर भूपेंद्र को उठा कर रिड़मल के घर धुंधाड़ा पहुंचाने का बीड़ा उठाया। इन सभी को बाहर बैठा लोकेश मॉनिटर कर रहा था। पहले 11 मार्च को बच्चा घर से नहीं निकला, मगर 12 मार्च को बहन के साथ बाहर आया तो वे उसे उठा ले गए।
3. गुमराह- महेंद्र को कॉल किया कच्चे रास्तों से गए
पुलिस को भ्रमित करने के लिए अपहर्ताओं ने बच्चे को उठाकर धुंधाड़ा पहुंचने तक उन कच्चे मार्गों से रास्ता तय किया जहां न टोल नाके थे और न ही कहीं सीसी टीवी कैमरा। बच्चे को उठाया जयपुर रोड से, ले गए नागौर रोड पर और फर्जी आईडी से सिम जैसलमेर रोड से खरीदा। सिम खरीदा वहां सीसी टीवी था, वारदात 40 दिन बाद की ताकि वहां का रिकॉर्ड भी ना मिले। उन्होंने सियाराम को फोन करने के बाद महेंद्र को भी कॉल करवड़ से किया ताकि पुलिस पारिवारिक विवाद में इस बच्चे का अपहरण समझे और लोकेशन में भी उलझ जाए।
4. चूक- अचानक कुक जितेंद्र का गायब होना
पुलिस पहले दो दिन तक पारिवारिक विवाद के इर्द-गिर्द घूमती रही। मगर 14 मार्च को अचानक पता चला कि घर के सामने रेस्टोरेंट का कुक जितेंद्रसिंह अपहरण के एक दिन पहले से गायब है। जितेंद्र, रिड़मल व नटवर के फोन ट्रेस किए तो वे वारदात से पहले ही बंद हो गए थे और पांच घंटे बाद चालू हुए थे। यहीं से उन तीनों पर शक हो गया। नटवर मोहल्ले में ही था और पुलिस की एक्टिविटी पर नजर रख रहा था तो पुलिस ने सबसे पहले उसे पकड़ा तो पूरा राज खुल गया। यह सूचना जितेंद्र व रिड़मल तक पहुंच गई, उन्होंने उसी रात बच्चे को होटल पर छोड़ दिया।
केस हल करने में 60 साल के एसएचओ में युवा जैसा जोश
बनाड़ थानाधिकारी 60 वर्षीय हनुमान सिंह (बाएं) 31 मार्च को रिटायर होने वाले हैं लेकिन इस केस को हल करने में उनका जोश ऐसा था मानो वे टीम में सबसे युवा हों। पुलिस कमिश्नर ने इसकी तारीफ भी की। इसी तरह सब इंसपेक्टर कमलदान चारण (दाएं) ने चार दिन तक थाने को ही घर बना लिया। वे आरोपियों को पकड़ने के बाद ही अपने घर गए।
कार चोरी व फर्जी सिम के मामले दर्ज
- नटवर सिंह ने 29 जनवरी को फर्जी दस्तावेज से सिम खरीदी व बासनी थाना क्षेत्र में कार चुराई। पुलिस ने दोनों मामले दर्ज किए।
- पुलिस के हरकत में आते ही लोकेश सारण ने साथ देने से मना कर दिया। इससे फूट पड़ गई। जितेंद्र ने भी फोन बंद कर दिया।
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