लाखों खर्च कर 10 चौराहों से हटाए सर्किल, पांच पर वापस बनाने पड़े

पोस्ट पसंद आये तो लाइक जरुर करे ?

DN news

 

जोधपुर. हार्ट लाइन सहित 15 बीआरटीएस रूट्स पर ट्रैफिक को सुगम बनाने के लिए ढाई साल पहले शहर के 10 प्रमुख चौराहों पर सर्किल हटा ट्रैफिक लाइट्स लगाई लेकिन चार से ज्यादा रास्तों वाले चौराहों पर ट्रैफिक सुधरने की बजाय आैर बिगड़ गया। ऐसे चौराहों में जालोरी गेट, रातानाडा, जलजोग और पांचवीं रोड चौराहा प्रमुख थे।

जोधपुर. हार्ट लाइन सहित 15 बीआरटीएस रूट्स पर ट्रैफिक को सुगम बनाने के लिए ढाई साल पहले शहर के 10 प्रमुख चौराहों पर सर्किल हटा ट्रैफिक लाइट्स लगाई लेकिन चार से ज्यादा रास्तों वाले चौराहों पर ट्रैफिक सुधरने की बजाय आैर बिगड़ गया। ऐसे चौराहों में जालोरी गेट, रातानाडा, जलजोग और पांचवीं रोड चौराहा प्रमुख थे।

जालोरी गेट पर ट्रैफिक सुधारने के लिए प्रशासन ने प्रयोग पर प्रयोग किए, लेकिन हर प्रयोग विफल होने के बाद अब फिर सर्किल बनाए जा रहे हैं। जालोरी गेट, रातानाडा चौराहा व जलजोग पर डिवाइडर लगाकर अस्थाई चौराहे का रूप भी दे दिया है। इससे यहां ट्रैफिक सुगम हुआ और हादसों में कमी आई। नतीजे उत्साहजनक रहे तो अब ट्रैफिक पुलिस चार रास्तों से ज्यादा वाले रास्तों के सभी चौराहों पर रोटरी बनाने का मानस बना रही है।

 जब चौराहों को तोड़ा गया था तो तत्कालीन अफसरों ने मॉनिटरिंग कमेटी का हवाला दिया था, लेकिन कमेटी ने स्पष्ट कहा था कि इन चौराहों को हटाने के पहले एक्शन प्लान बनाकर ही फैसला लें, लेकिन अफसरों ने अपने दबाव को कम करने के लिए शहर के दस प्रमुख चौराहों को हटा दिया था।

इसी कारण चौराहों पर प्रयोग विफल साबित हो रहे हैं। पहले चौराहों से सर्किल हटाने के लिए प्रशासन ने लाखों रुपए खर्च किए तो अब फिर से कई जगह सर्किल बनाने पर लाखों रुपए खर्च करने होंगे।

हटाते समय दी दलील घूमकर जाने से ज्यादा लगता है समय

तीन साल पूर्व विभिन्न शहरों से आए एक्सपर्ट ने शहर विजिट किया था। उन्होंने कहा था कि जहां रोटरी बनी हुई है, वहां ट्रैफिक सिग्नल की जरूरत नहीं है। ट्रैफिक घूमकर चलता है, जिससे हादसों का डर नहीं रहता। लेकिन प्रशासन ने मॉनिटरिंग कमेटी का हवाला देकर व्यस्ततम ट्रैफिक वाले दस चौराहों से रोटरी हटा दी। यह दलील दी थी कि चौराहों के कारण ट्रैफिक निकलने में समय ज्यादा लगता है, जिससे जाम लग जाता है। चौराहे हटने से ट्रैफिक तेजी से गुजरेगा जाम से बचा जा सकेगा। हकीकत में इसका उल्टा ही हुआ। 

...अब कारण बता रहे अस्थाई सर्किल बनाने से हादसे रुके 

जालोरी गेट पर आधा दर्जन प्रयोग के बाद ट्रैफिक पुलिस ने अस्थाई रूप से अंडाकार सर्किल बनाया तो लोगों को राहत मिली। पांच रास्तों वाले रातानाडा बाजार के चौराहे पर भी बेरिकेड्स से अस्थाई सर्किल बनाया और  जलजोग चौराहे पर यही प्रक्रिया अपनाई।  अब ट्रैफिक पुलिस छह रास्तों वाले पांचवीं रोड चौराहे पर भी ऐसा ही विचार कर रही है। हालांकि ट्रैफिक पुलिस यहां स्थाई चौराहा बनाने की बात से इनकार कर रही है, लेकिन अफसरों का मानना है कि ट्रैफिक को सुगम करना है तो यहां चौराहा बनाना ही पड़ेगा। 

चौराहे हटाने से पहले योजना होती तो प्रयोग की नौबत ही नहीं आती

जेडीए अगले वित्त वर्ष में 60-70 करोड़ की लागत से फ्लाई आेवर बनाने की योजना बना रहा है। फिलहाल यह तय नहीं हो पाया है कि यह फ्लाईओवर किस चौराहे पर बनेगा, लेकिन जयपुर में जेडीए आयुक्त जोगाराम तथा नगरीय विकास विभाग के प्रमुख अफसरों के बीच इसको लेकर गंभीर मंथन शुरू हो चुका है। शीघ्र ही इसकी घोषणा हो सकती है।

- चौराहे तोड़ने के पहले कोई ठोस योजना होती तो प्रयोग करने की नौबत नहीं आती। हार्टलाइन पर ट्रैफिक दबाव हल करने के लिए फ्लाईओवर या एलिवेटेड रोड की जरूरत है। वैसे जहां सर्किल है, वहां सिग्नल बिना ही ट्रैफिक संचालन आसानी से हो सकता है। - समीर रस्तोगी, कंसल्टेंट

Share on Google Plus

About Atul

This is a short description in the author block about the author. You edit it by entering text in the "Biographical Info" field in the user admin panel.

0 comments:

Post a Comment