स्कूल के वो मस्ती भरे दिन हम आज भी याद करते हैं, खासकर तब, जब दोस्तों की टोली एक साथ होती है और एक दूसरे की टांग खींची जाती है. हम सभी एक दूसरे की उन नादानियों पर ठहाके मार कर हंसते हैं जो हमने कभी स्कूल में की थीं. कई बार टीचर से मिली पनिशमेंट्स चर्चा का खास विषय भी बन जाती हैं और हम एक दूसरे की पोल खोलने लगते हैं. ये 15 तरह की पनिशमेंट्स आज के बच्चों के लिए मानों इतिहास का पाठ हो चुकी हैं, ज़रा ध्यान दिजिएगा.

1. मुर्गा बनना

जब टीचर शैतानी करते हुए आपको रंगे हाथ दबोच लेता था, तो उनसे बचना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन हो जाता था. भले ही आप कितने ही बहाने बना लें, वे मुर्गा बनाकर ही छोड़ते थे. आप मुर्गा बनने के बाद भी दोस्तों की तरफ देखकर ऐसे मुस्कारते थे मानों आपको इसमें मज़ा आ रहा हो.

2. डंडे से हाथ लाल कर देना

सबसे ज्यादा डर आपको इसी पनिशमेंट से लगता था. इससे बचने के लिए हम क्या नहीं करते थे. डांडा भले ही हाथ को छूकर निकला हो, लेकिन आंखों से आंसू ये सोचकर छलक ही पड़ते थे कि शायद उन्हें देखकर टीचर का दिल पिघल जाए और वो हम बख़्श दें.

3. उंगलियों के बीच पेन दबाना

टीचर आपकी उंगलियों के बीच एक पेंसिल/पेन लगाकर उसे धीरे-धीरे दबाता था. जब वो दबाव आपको महसूस होता था, तो आप अपने आपको चिल्लाने से रोक नहीं पाते थे.

4. क्लास से बाहर निकाल देना

इस पनिशमेंट से सबसे ज़्यादा प्यार उन स्टूडेंटस् को था, जो क्लास में नहीं बैठना चाहते थे. अगर एक दोस्त को टीचर क्लास से बाहर निकाल देता था तो बाकी दोस्त भी पीछे हो लेते थे. यही थी उस समय की यारी!

5. दोस्त को दोस्त से थप्पड़ लगवाना

ये पनिशमेंट दोस्तों के लिए अग्नि परिक्षा से कम नहीं थी. इसमे अधिकतर दोस्त फेल ही हो जाते थे. क्योंकि अगर दोस्त अपने दोस्त को थप्पड़ नहीं मारता था, तो टीचर उसकी अच्छे से क्लास लेता था.

6. ग्राउंड के चक्कर लगाना

इस पनिशमेंट से आपको यह अहसास हो जाता था कि आप स्कूल में नहीं किसी मिलेट्री ट्रेनिंग पर हैं जहां हर गलती पर ग्रांउड के चक्कर लगाने की सज़ा दी जाती है.

7. स्कूल की छुट्टी के बाद एक ही शब्द को बार-बार लिखना

याद है ना? जब भी कोई शब्द आप गलत लिख देते थे, तो आपको स्कूल की छुट्टी के बाद वही शब्द दो सौ बार लिखने की सज़ा से नवाज़ा जाता था.

8. बैंच पर खड़े होने का सौभाग्य

जब सब बैठे हों, लेकिन आपके हाथ ऊपर करवा कर बैंच पर खड़ा कर दिया जाए, तो उसे आपका सौभाग्य ही समझा जाएगा. ये सज़ा क्लास में आपको सबसे अलग दिखाती थी.

9. पिछवाड़े पर डंडे की मार

इस सज़ा के मिलने के बाद आप कुछ समय के लिए बैठने में असमर्थ हो जाते थे. टीचर ये पनिशमेंट आपको तब देता था जब आप उसका पिरियड बंक मार कर मज़े उड़ा रहे होते थे.

10. दीवार से नाक चिपका कर खड़े करवाना

ये सज़ा आपको तब दी जाती थी जब आप क्लास में अपनी गर्दन को कुछ ज्यादा ही घुमा रहे होते थे. तब टीचर आपको दीवार से नाक सटा कर खड़े होने की सज़ा प्रदान करता था. जिसके बाद आप दीवार की गहराई में खो जाते थे.

11. ‘ऊठक-बैठक’

इस सज़ा से शायद ही आप कभी बचे हों. क्योंकि इसका इस्तेमाल घर से लेकर ट्यूशन वाले महोदय भी करते थे. इसमे आप कान पकड़ कर लगातार उठते और बैठते थे. ये प्रकिया निरंतर चलती थी, जब-तक आपको रूकने के लिए न कहा जाए या फिर आपके घुटने जवाब न दे दें.

12. असेम्बली में आपकी तौहीन

आपकी यूनिफ़ार्म पूरी न होने की वजह से जब आपकी पिटाई असेंबली में सबके सामने होती थी तो दर्द होने के साथ-साथ आपके सम्मान को भी ठेस पहुंचती थी. जिसके बाद वो टीचर आपकी नज़रों से गिर जाता था.

13. टीचर के गुस्से की अलग सज़ा

कई बार आपको कोई पनिशमेंट नहीं दी जाती, बल्कि किसी टीचर के गुस्से का सामना करना पड़ता था. जो अपने आप में एक सज़ा से कम नहीं थी.

14. क्लास से लेकर स्कूल के ग्राउंड की सफ़ाई करना

आप क्लास से कचरा बड़े आराम से उठा लेते थे. लेकिन जैसे ही टीचर आपको ग्राउंड से कचरा उठाने के लिए कहते थे, तो आपका ख़ून ज़रूर खौल उठता था.

15. मम्मी/पापा को स्कूल बुलाना

ये आपको तब बोला जाता था, जब ऊपर दी गई सभी पनिशमेंट आपको दी जा चुकी होती थीं. लेकिन आप फिर भी टीचर से कहते थे “कि सर मम्मी-पापा नहीं आ सकते, कोई पनिशमेंट ही दे दीजिए.”
यह एक खुशी की बात है कि अब बच्चों को स्कूल में इस तरह की पनिशमेंट देना एक अपराध बन चुका हैं. क्योंकि टीचर एक माली की तरह होता है जो कमजोर बच्चे को सहारा देकर ऊपर उठाता है, न कि उसकी पिटाई कर उसे सुधारने की कोशिश करता है. बच्चों को बस प्यार दिया जाए तो नतीजा सही ही निकलेगा.