जनसंख्या के मामले में दूसरे नंबर पर आने वाले भारत में बहुत से लोग बहुत से काम करते हैं. काम कोई भी हो, कभी छोटा या बड़ा नहीं होता. आदमी की सोच ही उस काम को छोटा-बड़ा बनाती है. और हमारे देश में काम से, पगार से बंदे की सोच का अंदाजा लगाया जाता है. वैसे हम यहां सोच की नहीं बल्कि काम की बात कर रहे हैं. ऐसे काम जो लोग भारत में कर के अपना और अपने परिवार का पेट भरते हैं.

1. कान की सफ़ाई

बापू ने कहा था कि बुरा मत बोलो, बुरा मत देखो और बुरा मत सुनो. जो ये सुनने वाला मामला है, इसके लिए आपको अपने कान की समय-समय पर इनसे सफ़ाई करवाते रहना पड़ेगा. ये लोग आपको सार्वजनिक जगहों पर अपने एक विशेष पिन-नुमा औज़ार से लोगों के कान साफ़ करते मिल जाएगें.

2. रिक्शा

ऑटोरिक्शा पर तो आप सब बैठे होंगे. लेकिन जब आदमी आदमी को ढोने के पैसे लेता है तो उसे ‘साईकिल रिक्शा’ कहते हैं. हालांकि कोलकत्ता में तो रिक्शा हाथ से भी चलता है पर यह कहना सही होगा कि रिक्शा तो बस पेट से और पेट के लिए ही चलता है.

3. सड़क पर नाई

अकसर नाई दुकानें लगा कर बैठते हैं. पर हमारे देश में लोग खुले वातावरण को ज़्यादा महत्व देते हैं. क्या आपने पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर शेव करवाई है? अगर नहीं तो आज ही इस शेव का लुत्फ़ लें.

4. वज़न तोलने वाली मशीन

आमतौर पर रेलव स्टेशन, बस स्टैंड पर आपको एक मशीन के साथ खड़ा उसका मालिक मिल जाएगा. दो से पांच रुपये देकर आप सार्वजनिक जगहों पर सबके सामने ही अपना वजन तोल सकते हैं.

5. पिट्ठू

वैसे यह एक खेल का नाम भी है. पर यहां खेल नहीं हम काम की बात कर रहे हैं. वैष्णो देवी मां के मंदिर, अमरनाथ जैसे पर्वती इलाकों पर कुछ लोग चढ़ाई नहीं कर पाते, तो ये लोग उन्हें उस मुक़्कमल जगह तक पहुंचाते हैं.

6. मदारी और करतबबाज़

बंदरिया को “गुलाबो” कह कर पुकारना और फ़िर उसकी शादी जनता में खड़े किसी लड़के से करवा कर लोगों का मनोरंजन करने वाले उस मदारी को हम भूल नहीं सकते. छोटी बच्ची जब दो वक़्त के खाने के लिए रस्सी पर चलती और कभी रस्सी की तरह मुड़ जाने की कला दिखा कर लोगों को हैरान कर देती. यह करतब दिखाना भी तो एक काम है.

7. मोची

इस काम को करने वाले लोग आपको हर शहर, हर कोने में मिल जाऐंगे. दस रुपये देकर आप अपने जूते किसी मोची से सिलवा सकते हैं या पॉलिश करवा सकते हैं.

8. नुक्कड़ पर बैठे दंत चिकित्सक (स्ट्रीट डेंटिस्ट)

खाने के लिए तो भाई दांत ही मिले हैं. और कहीं से तो हम खा नहीं सकते. ये केवल 80 से 100 रुपये में आपके दांत के दर्द को ठीक कर देते हैं. इनके पास दंत चिकित्सक होने का प्रमाण नहीं होता लेकिन उन लोगों के लिए ये सही हैं, जो ज़्यादा पैसे दे कर अपने दांत ठीक नहीं करवा सकते.

9. चाबी बनाने वाले

भारतीय बाज़ारों में आपको ताले की चाबी बनाने वाले बहुत मिलेंगे. कुछ रुपये देकर आप ताले की नई चाबी बनवा सकते हैं. ये बाइक, कार व अन्य वाहनों तक की चाबी भी बनाते हैं.

10. रेल में सामान ढोने वाले ‘कुली’

हमारे देश में रेल का नेटवर्क सबसे बड़ा है. बहुत से लोग रेल में सफ़र करते हैं. रेलवे स्टेशन में सामान ढोने वाले लोग आपको मिलेंगे. ये आपके भारी सामान को ट्रेन पर चढ़ाते और उतारते हैं.

11. पहलवान पट्टी वाले

खेलते वक़्त हाथ टूट जाना, बस से उतरते समय पैर में मोच आ जाना और पार्टी में नाचते समय गर्दन में झटका लग जाने के बाद कुछ लोग मोहल्ले के उस ‘पहलवान चाचा’ से उसका इलाज करवा लेते हैं. अमूमन ये डिग्रीधारक नहीं होते. बस इनका काम तर्ज़ुबे से ही चलता है.

12. मालिश वाले

लेखक का मानना है कि दिन भर की थकान के बाद एक चटकदार सी मालिश तो बनती है. हालांकि मैट्रो शहरों में नाई भी सिर की मालिश करने लगें हैं. लेकिन बनारस, इंदौर, इलाहाबाद, कानपुर जैसे शहरों में आज भी कई लोग अपने बदन की मालिश ‘मालिश वाले चाचा‘ से ही करवाते हैं. फुटपॉथ पर मालिश करवाने का मज़ा ही कुछ और है साहब.
ऐसा नहीं है कि ये काम किसी और मुल्क में नहीं होते. पर ऐसा ज़रूर है कि भारत में ये काम कुछ ज़्यादा ही नज़र आते हैं.