जोधपुर। मथुरादास माथुर अस्पताल के सर्जरी के डॉक्टरों ने युवा महिला के पेट से तरबूज जितनी बड़ी गांठ निकाली जो लीवर से लेकर पेट के निचले हिस्से तक पहुंच गई थी। गांठ इतनी बड़ी होने के कारण 3D लेप्रोस्कोपिक सर्जरी संभव नहीं थी। ऐसे में पहले गांठ में छेट करके 3.5 लीटर फ्लुड निकाला गया, उसके बाद पेट में औजार पहुंचाकर सर्जरी की गई। महिला पिछले पांच साल से इस गांठ से परेशान थी और पांच साल तक ऑपरेट नहीं कराने के कारण यह बड़ी हो गई। यदि अब भी ऑपरेशन नहीं होता तो इसके पेट में ही फटने का अंदेशा था। एमडीएम अस्पताल में हुई लीवर के बिलियरी सिस्ट एडिनोमा की यह जटिल सर्जरी थी। विशेषज्ञों का दावा है कि लीवर की इतनी बड़ी गांठ की पश्चिमी राजस्थान की पहली 3D लेप्रोस्कोपिक सर्जरी है।
पेट को आधा कवर कर लिया गांठ ने
अस्पताल के सर्जरी आउटडोर में आई 27 वर्षीय महिला 5 साल से पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द, भारीपन से परेशान थी। जांच में लीवर में गांठ की पुष्टि हुई। गांठ ने दाएं साइड के पेट को आधे से भी ज्यादा कवर कर रखा था। इसका आकार लगभग 22 सेंटीमीटर गुणा 20 सेंटीमीटर गुणा 18 सेंटीमीटर था। जांच में लीवर की दुर्लभ गांठ बिलियरी सिस्ट एडिनोमा निकली जो भविष्य में कैंसर का खतरा पैदा कर सकती थी। इसने लीवर के दाएं लोब को लगभग 80 प्रतिशत खत्म कर दिया।
गांठ के साथ निकाला लीवर का हिस्सा
अस्पताल के सर्जन डॉ. दिनेश दत्त शर्मा ने बताया कि दूरबीन से ऑपरेशन के दौरान पेट में जगह नहीं बन रही थी। गांठ में छेद करके फ्लुड निकाला गया। इसके बाद ऑपरेशन में बिलियरी सिस्ट एडिनोमा को लीवर के एडज्वाइनिंग हिस्से के साथ बाहर निकाला गया, जो की काफी चैलेंजिंग था। ऑपरेशन के दौरान हार्मोनिक स्केलपल से लिवर का रिसेक्शन किया गया, ब्लीडिंग कंट्रोल करने के लिए लीवर के अंदर की छोटी-छोटी ब्लड वेसल्स को हार्मोनिक एवं लाइगा क्लिप द्वारा बांधा गया ताकि ब्लीडिंग को कंट्रोल किया। ऑपरेशन टीम में डॉ. अंशुल, डॉ. पारंग, डॉ. राकेश भटनागर, डॉ. हेमंत कुमार, डॉ. शोभा उज्जवल, डॉ. गीता सिंगारीया, डॉ. भरत चौधरी, डॉ. शिप्रा गोयल शामिल हुई।
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