जेएनवीयू में 34 साल में 26 अध्यक्ष, विधानसभा में पहुंचे 3, लोकसभा में केवल 1

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जोधपुर। जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय में वर्ष 1989-90 से 2021-22 तक कुल 34 साल में 26 नेता छात्रसंघ अध्यक्ष बने हैं। इनमें से अभी तक केवल चार छात्रसंघ अध्यक्ष ही लोकसभा-विधानसभा पहुंचे हैं। ऐसे में छात्रसंघ चुनाव लोकतंत्र की पहली सीढ़ी बनने में सफल नहीं रहा है। विश्वविद्यालयों में करोड़ रुपए खर्च करके छात्रसंघ अध्यक्ष बनने के बाद भी राजनीति में आगे सफलता नहीं मिलना आम बात हो गई है।

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ये पहुंचे लोकसभा-विधानसभा : वर्ष 1989-90 में एबीवीपी से जीते छात्रसंघ अध्यक्ष जालमसिंह रावलोत, वर्ष 1991-92 में एनएसयूआई से जीते हरीश चौधरी व वर्ष 1995-96 में छात्र संघर्ष समिति से जीते बाबूसिंह राठौड़ विधायक बने हैं। वहीं वर्ष 1992-93 में एबीवीपी से जीते छात्रसंघ अध्यक्ष गजेन्द्रसिंह शेखावत सांसद व केंद्रीय मंत्री बने हैं। इनके अलावा आज तक एक भी छात्रसंघ अध्यक्ष विधानसभा नहीं पहुंच पाया।

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34 साल में तीसरी बार रुके चुनाव : छात्र संघ चुनाव के इतिहास में 34 सालों में तीसरी बार चुनाव नहीं हो रहे है। पहली बार वर्ष 1989-90 से वर्ष 2004-05 तक लगातार 15 वर्ष तक चुनाव होने के बाद चुनाव बंद हुए, जो वापस 6 साल बाद 2010-11 में शुरू हुए। इसी तरह 2010-11 से 2019-20 तक लगातार 10 साल चुनाव होने के बाद कोरोना की वजह से दो साल चुनाव नहीं हुए। उसके बाद वर्ष 2021-22 में चुनाव हुए जो एक वर्ष बाद 2023-24 में इस साल वापस सरकार ने नहीं करवाने का निर्णय किया है।


छात्रसंघ चुनाव में करोड़ों खर्च

छात्र संघ चुनाव में हर वर्ष करोड़ों रुपए खर्च किए जाते है। पिछली वर्ष भी एपेक्स प्रत्याशियों के साथ-साथ केएन कॉलेज व सांयकालीन संकाय के प्रत्याशियों ने 8 करोड़ रुपए के करीब खर्च किए। कई छात्रनेताओं ने तो चुनाव के लिए अपनी जमीनें तक बेच डाली है। उसके बावजूद एक भी जीता हुआ छात्रनेता ना तो पार्टी में बड़े पद पर पहुंच पाया और ना ही पार्टी से टिकट देने का दावा कर पाया। चूंकि हर साल नया अध्यक्ष बनता है और हर अध्यक्ष को पार्टी में टिकट देना संभव नहीं है। ऐसे में करोड़ों खर्च करने के बाद भी छात्रनेताओं के लिए राजनीति में आगे का सफर मुश्किल होता जा रहा है।

छात्रसंघ चुनाव क्यों रोके : शेखावत

केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से छात्रसंघ चुनाव न करवाया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने राज्य सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदेश में छात्र संघ चुनाव क्यों रोके गए? केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि मैं मानता हूं कि छात्र राजनीति राष्ट्रीय राजनीति की पौधशाला है। छात्रों का यह लोकतांत्रिक अधिकार बहाल होना चाहिए।



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