राजेन्द्र सिंह देणोक
जोधपुर. बोर्ड बैठकों में करोड़ों का अनुमानित बजट पेश कर नगर निगम आमजन को कई तरह के ख्वाब सालों से दिखाते आ रहे हैं। लेकिन, वास्तविकता यह है कि अनुमानित बजट और वास्तविक राजस्व संग्रहण में भारी अंतर है। यानी जितना बजट अनुमान बताया जा रहा है, उसका 25 फीसदी राजस्व भी नगर निगम नहीं जुटा पा रहे हैं। पिछले चार साल के बजट आंकड़ों पर गौर करने पर यह चौंकाने वाली स्थिति सामने आई है।
राजस्व वसूली में कमजोर साबित होने के कारण प्रदेश के दूसरे बड़े शहर जोधपुर के दोनों नगर निगमों (उत्तर-दक्षिण) की आर्थिक हालत दयनीय है। आमदनी के लिहाज से दोनों आत्मनिर्भर नहीं बन पाई है।शहर का विकास सीधेतौर पर नगर निकायों से जुड़ा है। आमदनी के अभाव में इसका असर शहर के विकास पर पड़ रहा है। अनुमान और वास्तविकता में अंतर के कारण निगमों की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लग रहा है।
दो निगमों का नुकसान उत्तर को, कमाई के लाले
जोधपुर शहर में दो नगर निगम बनाने के पीछे विकास कार्यों में तेजी लाने की मंशा थी। लेकिन, इसका असर उलटा हुआ है। दोनों निगमों का बंटवारा होने का नुकसान नगर निगम उत्तर को झेलना पड़ रहा है। क्योंकि उत्तर की तुलना में नगर निगम दक्षिण में संपत्तियों की संख्या ज्यादा है। इससे उत्तर की आमदनी तुलनात्मक रूप से काफी कम है। आय के स्रोतों की कमी के कारण निगम उत्तर की माली हालत खराब है। शहर के विकास कार्यों और कार्मिकों के वेतन देने तक के कई बार लाले पड़ रहे हैं।
वसूली में दोनों निगम फेल
1-यूडी टेक्स : नगरीय विकास कर के रूप में सर्वाधिक राजस्व वसूली होती है। इसमें संभावनाओं की कमी नहीं है। लेकिन निगम अधिकारी वसूली करने में फेल साबित हो रहे हैं। यहां तक की एक निगम ने तो निजी फर्म को भी वसूली का ठेका दिया, लेकिन अब तक कोई खास सकारात्मक परिणाम नहीं दिखे हैं।
2-होर्डिंग साइट्स : होर्डिंग साइट्स की नीलामी से भी दोनों निगमों को आमदनी होती है। लेकिन शहर में अवैध होर्डिंग की भरमार है। अवैध होर्डिंग हटाने के लिए महज औपचारिकता की जाती है। नगर निगमों का इस पर कोई नियंत्रण भी नहीं है। ऐसे में सीधेतौर पर निगम की कमाई पर असर पड़ रहा है।
3-पार्किंग : पार्किंग से भी दोनों नगर निगमों को सालाना अच्छी कमाई हो सकती है। इसके उपरांत नगर निगम पार्किंग से आमदनी करने के प्रति ज्यादा गंभीर नहीं है। जबकि, शहर का काफी विस्तार हो चुका है। पार्किंग एक बड़ा मुद्दा है।ये भी हो सकते हैं आय के साधन : कोचिंग संस्थान, विवाह स्थल, लेंडयूज चेंज, ट्रेड लाइसेंस, फायर अनुमति, कचरा संग्रहण इत्यादि।
अनुमानित आय और वास्तविक कर संग्रहण की स्थिति
2017-18 :
अनुमानित - 30वास्तविक -07
2018-19
अनुमानित-30वास्तविक-03
2019-20
अनुमानित-20वास्तविक-08
2020-21
अनुमानित दक्षिण-20वास्तविक 05
अनुमानित उत्तर-15वास्तविक उत्तर05
2021-22
अनुमानित दक्षिण-15वास्तविक दक्षिण04
अनुमानित उत्तर-10वास्तविक उत्तर-01
2022-23
अनुमानित दक्षिण-18अनुमानित उत्तर-10
इच्छाशक्ति हो तो बढ़ सकती हैं आय
अधिकारियों की इच्छा शक्ति हों तो निगम की आय बढ़ सकती है। बजट और राजस्व वसूली में इसलिए अंतर रहता है। प्रशासन शहरों के संग अभियानों में दरें कम होने से भी आय प्रभावित हुई। इस बार हमारे प्रयास है कि ज्यादा से ज्यादा वसूली कर सकें।
वनीता सेठ, महापौर, नगर निगम दक्षिण
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